युवाओं के साथ संवाद को नई दिशा
नरेंद्र मोदी सरकार अब देश के युवाओं और छात्रों के साथ सीधे जुड़ने के लिए एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान की रूपरेखा तैयार कर रही है। सरकार ने इस नई पहल को 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' का नाम दिया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि सरकार के प्रतिनिधि यानी केंद्रीय मंत्री केवल दफ्तरों या मंत्रालयों तक सीमित न रहें, बल्कि वे सीधे विश्वविद्यालय परिसरों में जाकर छात्रों से रूबरू हों। इस अनोखी पहल के जरिए सरकार न केवल अपनी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी युवाओं तक पहुंचाना चाहती है, बल्कि छात्रों के मन में चल रही शंकाओं, उनकी समस्याओं और भविष्य को लेकर उनकी चिंताओं को भी समझना चाहती है।
सीधा संवाद और जमीनी हकीकत
इस प्रस्तावित योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सीधा संवाद है। सूत्रों के अनुसार, देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में हर दिन एक केंद्रीय मंत्री पहुंचेंगे। वहां वे कैंपस के माहौल का अनुभव करेंगे और छात्रों के साथ उन मुद्दों पर खुलकर चर्चा करेंगे जो सीधे तौर पर युवाओं के जीवन को प्रभावित करते हैं। इन चर्चाओं में मुख्य रूप से शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार के अवसर, स्किल डेवलपमेंट यानी कौशल विकास, परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।
सरकार का मानना है कि इस तरह के सीधे संवाद से दिल्ली और विश्वविद्यालयों के बीच की दूरी कम होगी। छात्रों को भी एक मंच मिलेगा जहाँ वे अपनी बात सीधे सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के सामने रख सकेंगे। इससे नीति निर्माताओं को यह समझने में आसानी होगी कि देश का युवा वर्ग वास्तव में किन चुनौतियों का सामना कर रहा है और उनकी उम्मीदें क्या हैं।
जिम्मेदारी और कार्यान्वयन
इस पूरी योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने विशेष जिम्मेदारी तय कर दी है। जानकारी के मुताबिक, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया इस कार्यक्रम के समन्वय का मुख्य कार्य संभाल रहे हैं। ये दोनों मंत्री विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रबंधन और अपने अन्य साथी मंत्रियों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को धरातल पर उतारने की कार्ययोजना बना रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस अभियान को लेकर कितनी गंभीर है।
परीक्षा विवादों की पृष्ठभूमि
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छिड़ी हुई है। पिछले कुछ समय में NEET विवाद के चलते छात्रों में काफी नाराजगी देखी गई थी। दिल्ली सहित देशभर के कई बड़े शहरों में छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे। 20 जुलाई को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर कड़े सवाल उठाए थे, जो बाद में संसद के मानसून सत्र में भी प्रमुखता से गूंजे। इसी कड़ी में 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा था। ऐसे में सरकार का विश्वविद्यालयों तक सीधे पहुंचने का यह निर्णय छात्रों के साथ भरोसे का रिश्ता फिर से कायम करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
अभियान का विस्तार
यदि इस अभियान के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह बेहद विशाल होने वाला है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में करीब 1,300 विश्वविद्यालय कार्यरत हैं। इन संस्थाओं में 57 केंद्रीय विश्वविद्यालय और 522 राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। इनके अलावा निजी और डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालयों की संख्या भी काफी बड़ी है। यदि सरकार अपने 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' मॉडल को इसी गति से आगे बढ़ाती है, तो आने वाले समय में देश के शैक्षणिक परिसरों में केंद्रीय मंत्रियों की सक्रिय उपस्थिति एक सामान्य दृश्य बन जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य न केवल सरकार की छवि को सुधारना है, बल्कि जमीनी स्तर पर युवाओं के साथ जुड़कर एक सकारात्मक बदलाव लाना भी है।
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