हाफिज सईद की करतूतों पर मौलवी का बड़ा खुलासा
पाकिस्तान हमेशा से ही आतंकवाद को पनाह देने और उसे बढ़ावा देने के आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन अब उसी के देश के एक मौलवी ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और वैश्विक आतंकी हाफिज सईद को लेकर एक पाकिस्तानी मौलवी नसीर मदनी ने ऐसा बयान दिया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मचा दी है। मदनी ने दावा किया है कि हाफिज सईद ने कश्मीर घाटी में 10 हजार से भी अधिक आतंकियों को भेजा था। यह बयान तब सामने आया है जब क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा हो रही है।
बहावलनगर कार्यक्रम में दिया गया बयान
यह चौंकाने वाला बयान 14 अगस्त को बहावलनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया। मौलवी नसीर मदनी, जो इस महीने की शुरुआत में ही स्वास्थ्य समस्याओं और दिल का गंभीर दौरा पड़ने के बाद चर्चा में आए थे, एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर सक्रिय दिखे। उन्होंने खुले तौर पर मंच से यह स्वीकार किया कि लश्कर-ए-तैयबा के सरगना ने किस तरह कश्मीर को दहलाने की साजिश रची थी। उनके इस बयान ने जम्मू-कश्मीर में बरसों से चले आ रहे आतंकवाद के पीछे पाकिस्तान की भूमिका पर एक बार फिर से मुहर लगा दी है।
आतंक का पर्याय हाफिज सईद
हाफिज सईद केवल पाकिस्तान का एक नाममात्र मौलवी या नेता नहीं है, बल्कि वह भारत के लिए सबसे बड़ा दुश्मन और आतंक का पर्याय बन चुका है। वह लश्कर-ए-तैयबा नामक उस संगठन का निर्माता है जिसने भारत की मिट्टी पर कई दर्दनाक आतंकी हमलों को अंजाम दिया है। भले ही वह इस समय पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने पर छिपा बैठा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जांचों में उसका नाम बार-बार सामने आता रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने 2005 में ही लश्कर-ए-तैयबा को अल-कायदा और तालिबान से संबंध रखने के कारण प्रतिबंधित घोषित कर दिया था। इसके बाद 2008 में अमेरिका ने भी हाफिज सईद को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में शामिल कर दिया था।
पहलगाम हमला और कानूनी कार्रवाई
हाफिज सईद की मुश्किलें केवल बयानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कानूनी तौर पर भी वह लगातार घेरे में है। जुलाई 2026 में जम्मू की एक अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस ने उन छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ भी कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है जो अभी फरार हैं। यह कार्रवाई 'इन एब्सेंटिया' यानी आरोपियों की अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने की है। अगर इन मामलों में अदालत उन्हें दोषी करार देती है, तो भविष्य में उनके भारत प्रत्यर्पण होने पर उन्हें सीधे सजा सुनाई जा सकेगी। अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें ज्यादातर आम नागरिक थे। इस हमले के जवाब में ही भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था, जिसमें पाकिस्तान की सीमा में मौजूद आतंकी ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था।
26/11 मुंबई हमले का काला अध्याय
हाफिज सईद का नाम सबसे भयावह 26/11 मुंबई आतंकी हमले की जांच में भी प्रमुखता से लिया गया है। 26 नवंबर 2008 की उस काली रात को 10 आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई में घुस आए थे और लगातार चार दिनों तक उन्होंने शहर को बंधक बनाए रखा। इन हमलों में 166 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी और करीब 300 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इन हमलों ने पूरे विश्व को दहला दिया था। मौलवी नसीर मदनी के हालिया बयान ने उन जख्मों को फिर से ताजा कर दिया है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर हाफिज सईद की संलिप्तता का प्रमाण मिल रहा है। भारत के पास हाफिज सईद के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और आने वाले समय में उसे उसके किए की सजा भुगतनी होगी।
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