भागदौड़ भरी जिंदगी और शहर के शोर-शराबे से दूर अगर आप कुछ पल सुकून के बिताना चाहते हैं, तो झारखंड की राजधानी रांची के पास एक बेहद खूबसूरत और शांत जगह आपका इंतजार कर रही है। रांची से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नेहलगढ़ गांव इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। चारों तरफ से ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और हरी-भरी वादियों से घिरा यह छोटा सा गांव प्रकृति प्रेमियों और ध्यान लगाने वाले लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आते ही पर्यटकों को एक अनोखी शांति और मानसिक सुकून का अनुभव होता है, जो उन्हें उत्तराखंड के ऋषिकेश की याद दिला देता है।
नेहलगढ़ गांव: प्राकृतिक खूबसूरती और ऋषिकेश जैसा एहसास
नेहलगढ़ गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां की असीम शांति और प्राकृतिक वातावरण है। शहरों की कंक्रीट की दुनिया से दूर, इस गांव में कदम रखते ही आपको ठंडी हवाओं और चिड़ियों की चहचहाहट का अहसास होगा। स्थानीय निवासी कमलेश के अनुसार, इस जगह की शांति इतनी गहरी है कि अगर कोई व्यक्ति यहां महज एक घंटा भी बिता ले, तो उसका मन बिल्कुल शांत हो जाता है और सारे नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं। यही वजह है कि जो लोग एक बार इस खूबसूरत जगह पर आते हैं, वे दोबारा यहां आने के लिए आकर्षित होते हैं। यहां की हरियाली और शांत वादियां सैलानियों को ऋषिकेश जैसी पवित्र और शांत अनुभूति प्रदान करती हैं।
सुरक्षा के नियम और यहां पहुंचने का रास्ता
नेहलगढ़ गांव जाना बेहद आसान है। यह खूबसूरत गंतव्य रांची-टाटा रोड पर स्थित है। यदि आप यहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो आप गूगल मैप्स की मदद से बिना किसी परेशानी के आसानी से इस गांव तक पहुंच सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से यह जगह दिन के समय बेहद सुरक्षित मानी जाती है। हालांकि, स्थानीय निवासियों और जानकारों की मानें तो शाम होने से पहले यहां से निकल जाना ही समझदारी है। स्थानीय निवासी कमलेश बताते हैं कि दिन के उजाले में यहां सुरक्षा को लेकर कोई डर नहीं रहता है, लेकिन शाम को 5 बजे से पहले पर्यटकों को यहां से वापस लौट जाने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रात के समय इस घने इलाके में जंगली जानवरों के आने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
जंगल सफारी, पिकनिक और स्वादिष्ट मैगी का आनंद
प्रकृति के बीच समय बिताने वाले लोगों के लिए नेहलगढ़ के जंगल किसी रोमांचक सफर से कम नहीं हैं। यहां के जंगलों को सैलानी बहुत ही आसानी से एक्सप्लोर कर सकते हैं। घने पेड़ों के बीच से गुजरते हुए रास्ते पर्यटकों को काफी रोमांचित करते हैं। यहां आने वाले लोग अक्सर जंगलों के बीच बैठकर चूल्हा जलाते हैं और गरमा-गरम मैगी बनाने का लुत्फ उठाते हैं। खुले आसमान के नीचे, पहाड़ों और पेड़ों के बीच बैठकर मैगी खाने का अपना एक अलग ही मजा है, जिसे पर्यटक बेहद पसंद करते हैं।
सूर्यास्त का मंत्रमुग्ध कर देने वाला नजारा और बोनफायर
नेहलगढ़ गांव से दिखने वाला सूर्यास्त यानी सनसेट का नजारा बेहद खूबसूरत और मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। ढलते सूरज की लालिमा जब पहाड़ों के पीछे छिपती है, तो वह दृश्य देखने लायक होता है। इस अद्भुत नजारे को अपनी आंखों में कैद करने के लिए लोग 50 किलोमीटर दूर-दूर से यहां आते हैं। इसके अलावा, बड़े समूहों में आने वाले पर्यटकों के लिए रात के समय यहां बोनफायर (अलाव) का भी आयोजन किया जा सकता है। हालांकि, घने जंगल और रात के खतरे को देखते हुए बोनफायर के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की कड़ी हिदायत दी जाती है।
धार्मिक आस्था का केंद्र: मंदिर और तालाब
नेहलगढ़ गांव में केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं है, बल्कि यहां एक गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव भी महसूस होता है। जंगल के पास ही एक बेहद खूबसूरत तालाब और एक प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर में स्थानीय ग्रामीण नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने आते हैं। यहां आने वाले पर्यटक भी मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं। सैलानी अक्सर इस शांत तालाब के किनारे बैठकर और जंगल के बीच अपनी पसंद का खाना-पीना बनाकर पिकनिक का पूरा आनंद लेते हैं। यह जगह दोस्तों और परिवार के साथ एक शांत और सुखद दिन बिताने के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।
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