क्या पेट का दर्द सिर्फ गैस है या पित्त की थैली की पथरी? जान लें खतरे के संकेत

अक्सर पेट के दर्द को लोग गैस मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह गॉलब्लैडर में पथरी का गंभीर लक्षण हो सकता है। समय रहते पहचान और उचित उपचार ही बड़ी समस्याओं से बचाव का एकमात्र रास्ता है।

गैस और पथरी के बीच के अंतर को समझना है जरूरी

आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में खान-पान की अनिश्चितताएं और अधिक तैलीय भोजन का सेवन शरीर को कई तरह से प्रभावित कर रहा है। अक्सर लोग पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाले दर्द, गैस या बदहजमी को मामूली समस्या मानकर घर में रखी दर्द निवारक दवाएं खा लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा करना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। यह दर्द सिर्फ सामान्य गैस नहीं, बल्कि गॉलब्लैडर यानी पित्त की थैली में मौजूद पथरी का शुरुआती संकेत हो सकता है। दर्द को दवाओं से दबाने के बजाय इसकी समय पर पहचान करना बहुत जरूरी है।

गॉलब्लैडर में पथरी क्यों बनती है

वासुदेव हॉस्पिटल के डायरेक्टर और लैप्रोस्कोपिक जनरल सर्जन डॉ. विकास कुमार यादव के अनुसार, पित्त की थैली में पथरी का निर्माण मुख्य रूप से पित्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल और बाइल साल्ट के असंतुलन की वजह से होता है। कुछ मामलों में पिगमेंट स्टोन की समस्या भी देखने को मिलती है। पित्त की थैली में पथरी का होना एक आम समस्या बनती जा रही है, जिसका सीधा संबंध हमारी जीवनशैली और भोजन की आदतों से है।

कब सतर्क हो जाएं, जानें लक्षण

पित्त की थैली में पथरी होने पर मरीज को कई तरह की शारीरिक असहजता महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि वसायुक्त या अधिक तला-भुना खाना खाने के बाद अपच, पेट में भारीपन और तीव्र दर्द होना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इस दर्द की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह पेट के ऊपरी हिस्से में और विशेष रूप से दाहिनी तरफ अचानक बहुत तेज महसूस होता है। कई बार मरीज को गहरी सांस लेने, खांसने या छींकने पर भी दर्द में काफी तेजी महसूस होती है। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए और पथरी पित्त की नली में खिसक जाए, तो मरीज को पीलिया जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

पेनकिलर से दूरी बनाना क्यों जरूरी है

डॉ. विकास कुमार यादव का कहना है कि बार-बार होने वाले पेट दर्द को केवल पेनकिलर लेकर टाल देना बहुत बड़ी गलती है। दवाएं अस्थायी रूप से दर्द कम कर सकती हैं, लेकिन समस्या को जड़ से खत्म नहीं करतीं। यदि समय पर इलाज न हो, तो पथरी कॉमन बाइल डक्ट में फंस सकती है, जिससे पित्त की नली में संक्रमण यानी कोलेंजाइटिस हो सकता है। इसके अलावा, पैंक्रियाटिक डक्ट में रुकावट आने से पैंक्रियाटाइटिस जैसी जानलेवा स्थिति भी पैदा हो सकती है। इस स्थिति में मरीज को तेज बुखार, उल्टी और पेट में असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है।

जांच और उपचार का सही तरीका

गॉलब्लैडर की समस्या का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे भरोसेमंद और प्रभावी जांच है। यदि किसी को भी पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द, बार-बार गैस या अपच की समस्या हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बाद ही उपचार की दिशा तय की जाती है।

  • खान-पान में बदलाव: उपचार के दौरान अधिक तैलीय और वसायुक्त भोजन का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।
  • सर्जरी का विकल्प: यदि पथरी की पुष्टि होती है और स्थिति सर्जरी की मांग करती है, तो उसमें अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।
  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी: वर्तमान में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी पित्त की थैली की पथरी के इलाज का सबसे आम, सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

अंत में, डॉक्टर की यही सलाह है कि शरीर के संकेतों को कभी भी हल्के में न लें। गैस और पथरी के दर्द में अंतर करना सीखें और लक्षणों के दिखने पर तुरंत किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं। सही समय पर लिया गया चिकित्सकीय परामर्श ही आपको भविष्य की गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।

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