अमेठी की 'जायंट किलर' की वापसी: स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बीजेपी का क्या है बड़ा मास्टर प्लान?

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का गठन किया है, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की एक शक्तिशाली वापसी हुई है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है।

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में स्मृति ईरानी का जोरदार आगमन

भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़े बदलाव करते हुए अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में गठित इस नई टीम में कई अनुभवी नेताओं को अहम पदों पर जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की वापसी को लेकर है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी लोकसभा सीट से मिली हार के बाद स्मृति ईरानी सक्रिय राजनीति और केंद्रीय संगठन की मुख्यधारा से थोड़ी दूर नजर आ रही थीं। हालांकि, अब उन्हें राष्ट्रीय महासचिव का महत्वपूर्ण पद देकर पार्टी ने संकेत दे दिया है कि उनकी उपयोगिता अभी खत्म नहीं हुई है। इस नियुक्ति को केवल एक संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि आने वाले 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

स्मृति ईरानी की भावुक प्रतिक्रिया और नया संकल्प

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद स्मृति ईरानी ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर पार्टी के इतने ऊंचे संगठनात्मक पदों तक पहुंचा, यह उनके लिए अत्यंत गर्व और विनम्रता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का उन पर भरोसा जताने के लिए धन्यवाद दिया। स्मृति ने स्पष्ट किया कि वह अब पूरी निष्ठा के साथ जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए काम करेंगी। उन्होंने ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में अपनी पूरी ताकत लगाने का वादा किया है।

टीवी स्टार से बीजेपी की कुशल रणनीतिकार तक का सफर

स्मृति ईरानी का राजनीति तक पहुंचने का रास्ता काफी दिलचस्प रहा है। मनोरंजन जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली स्मृति ने जब राजनीति में कदम रखा, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह बीजेपी के सबसे मुखर और प्रभावी चेहरों में से एक बन जाएंगी। केंद्र सरकार में मंत्री के तौर पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला और अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार मिलने के बाद उनकी केंद्रीय भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे थे, लेकिन अब पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर फिर से मुख्य भूमिका में लाकर खड़ा कर दिया है।

अमेठी ने दिलाई थी 'जायंट किलर' की पहचान

स्मृति ईरानी की राजनीतिक साख का सबसे बड़ा केंद्र उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट रही है। साल 2014 में उन्होंने पहली बार वहां से अपनी किस्मत आजमाई थी, जहां उन्हें कांग्रेस के राहुल गांधी के सामने हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने वहां से अपना नाता नहीं तोड़ा। अगले पांच वर्षों तक लगातार अमेठी के गांव-गांव में जाकर उन्होंने जनसंपर्क किया और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया। इसका परिणाम साल 2019 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला, जब उन्होंने राहुल गांधी को 55,120 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त देकर देश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर किया। उस जीत ने उन्हें बीजेपी के लिए 'जायंट किलर' के रूप में स्थापित कर दिया। हालांकि, 2024 के चुनाव में कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें 1.67 लाख से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया, फिर भी राज्य में उनकी राजनीतिक पहचान और पकड़ अब भी मजबूत है।

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पर बीजेपी की विशेष नजर

उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने पार्टी के लिए चिंताएं बढ़ाई थीं। विपक्षी दल इंडिया गठबंधन ने राज्य की कुल 80 सीटों में से 43 पर कब्जा जमाया था, जबकि एनडीए को केवल 36 सीटें मिलीं, जिनमें बीजेपी को 33 सीटों से संतोष करना पड़ा। इस परिणाम के बाद पार्टी ने अब यूपी के संगठन को नए सिरे से तैयार करने का निर्णय लिया है। नई राष्ट्रीय टीम में स्मृति ईरानी के साथ-साथ सुनील बंसल, विनोद तावड़े, बिप्लब कुमार देब और सतीश पूनिया जैसे दिग्गजों को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। यह साफ दर्शाता है कि बीजेपी अपनी चुनावी मशीनरी को फिर से धार देना चाहती है। सुनील बंसल का अनुभव बूथ प्रबंधन और डेटा-आधारित राजनीति में माहिर माना जाता है, जबकि स्मृति ईरानी की आक्रामक चुनावी शैली पार्टी को एक आक्रामक बढ़त दिलाने में मदद करेगी।

महिला मतदाताओं पर विशेष ध्यान

स्मृति ईरानी की नई भूमिका को महिला वोट बैंक को साधने की बीजेपी की बड़ी योजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। पिछले दस वर्षों में महिला मतदाता बीजेपी के लिए जीत का बड़ा आधार रही हैं। उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पार्टी ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार का दावा किया है। स्मृति ईरानी पूर्व में महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं और बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष के रूप में भी उनका अनुभव रहा है। उनके पास प्रशासन और महिला संगठन दोनों का गहरा अनुभव है, जिसे पार्टी 2027 के चुनाव में भुनाने की कोशिश करेगी।

क्या फिर से पुरानी जंग होगी जीवंत?

स्मृति ईरानी की नियुक्ति का एक प्रतीकात्मक संदेश भी है। जिस अमेठी से राहुल गांधी को हराकर उन्होंने राष्ट्रीय फलक पर धाक जमाई थी, आज वहीं पर कांग्रेस एक बार फिर से राहुल गांधी के नेतृत्व में अपने संगठन को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में स्मृति ईरानी का राष्ट्रीय महासचिव बनना, यूपी की राजनीति में बीजेपी की आक्रामक वापसी का संकेत है। पार्टी उनके अनुभव और प्रचार करने की आक्रामक शैली को यूपी में फिर से इस्तेमाल करना चाहती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्मृति ईरानी 2019 की अपनी पुरानी चमक और रणनीति को 2027 के यूपी दंगल में दोबारा पैदा कर पाएंगी।

https://hindi.news18.com/news/nation/why-nitin-nabin-gave-such-big-responsibility-to-smriti-irani-what-is-plan-behind-making-her-bjp-general-secretary-10758401.html