अंबाला का ऐतिहासिक धरोहर
हरियाणा के अंबाला में स्थित जमना दास जवाहर लाल मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और प्राचीन परंपराओं के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर 144 साल पुराना है, जिसकी स्थापना वर्ष 1882 में की गई थी। आज भी यह मंदिर अपने मूल स्वरूप में पूरी तरह सुरक्षित और सुदृढ़ है।
जय-विजय और मंदिर की खासियत
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसके प्रवेश द्वार पर मौजूद जय और विजय की प्रतिमाएं हैं। मान्यता है कि यहां भगवान शिव की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक इन द्वारपालों के दर्शन न कर लिए जाएं। मंदिर के पुजारी दिनेश कुमार शर्मा के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण पानीपत के बडसल निवासी मोनू मल द्वारा करवाया गया था, जिन्होंने स्थापना के समय से ही इन मूर्तियों को यहां स्थापित किया था।
बिना सरिया के खड़ी हैं मजबूत दीवारें
मंदिर की निर्माण शैली आज के दौर में भी शोध का विषय है। इसकी दीवारें 22 इंच मोटी हैं, जो इसे मजबूती प्रदान करती हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मंदिर का पुराना लेंटर बिना किसी लोहे के सरिए का इस्तेमाल किए बनाया गया था, फिर भी यह 144 वर्षों से पूरी मजबूती के साथ अपनी जगह पर कायम है।
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
मंदिर में प्राचीन शिवलिंग और राम दरबार श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का प्रतीक है। सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करते हैं।
https://hindi.news18.com/news/dharm/meet-jaya-and-vijaya-jamna-das-jawahar-lal-mandir-local18-10758074.html