संगठन के बदलाव और कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट
भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर हुए हालिया बदलावों ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है, जिसके बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावनाओं ने तूल पकड़ लिया है। इस नई टीम में कई ऐसे नेताओं को जगह दी गई है जो वर्तमान में केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा हैं। विशेष रूप से, वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का नया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो इस फेरबदल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री के तीसरे कार्यकाल का लगभग आधा समय पूरा हो चुका है और इस दौरान मंत्रिमंडल में कई स्थान रिक्त हुए हैं। आगामी वर्ष में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, राजनीतिक विश्लेषक इसे एक बड़े संकेत के तौर पर देख रहे हैं। न्यूज चैनल सीएनएन-न्यूज18 के विश्वसनीय सूत्रों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मानसून सत्र के समापन से पूर्व कैबिनेट विस्तार की कोई योजना नहीं थी, लेकिन अब संसद का सत्र समाप्त हो चुका है और संगठन की नई टीम का एलान भी हो गया है, जिससे कयासों का दौर तेज हो गया है।
मंत्रिमंडल में रिक्तियां और बदली हुई जिम्मेदारियां
पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार के ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। जुलाई के महीने में धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। इसी तरह, 24 जुलाई को रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय रेल और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि उनका राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया था।
इसके अतिरिक्त, अल्पसंख्यक मामलों के साथ-साथ मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय संभाल रहे राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी जून 2026 में अपना राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्रिमंडल से विदाई ले ली। इन इस्तीफों और फेरबदल के कारण वर्तमान में कई मंत्रालय अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहे हैं। यदि प्रधानमंत्री नए चेहरों को शामिल करने का निर्णय लेते हैं, तो इन खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों को भरने की कवायद पूरी की जा सकती है।
संगठन और सरकार के बीच तालमेल
भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा का सीधा असर मोदी कैबिनेट पर पड़ सकता है। पार्टी ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों में संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। उदाहरण के तौर पर, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की कमान सौंपी गई है, वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल पीयूष गोयल की भूमिका को लेकर है। बतौर वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री, उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाना यह संकेत देता है कि संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि अभी तक पार्टी या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि गोयल अपना मंत्री पद छोड़ेंगे, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बाद उनके सरकारी कामकाज के स्वरूप में बदलाव हो सकता है।
रामदास आठवले के बयान से मिली हवा
कैबिनेट विस्तार की अटकलों को केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के एक बयान से और अधिक बल मिला है। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से कहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल बहुत जल्द देखने को मिल सकता है। आठवले का मानना है कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कुछ नए चेहरों को सरकार में शामिल किया जा सकता है। यद्यपि इसे सरकार का आधिकारिक वक्तव्य नहीं माना जा सकता, लेकिन उनके इस दावे ने चर्चाओं को और अधिक गति प्रदान कर दी है।
नितिन नवीन की नई टीम में कौन-कौन शामिल?
सोमवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित की गई नई राष्ट्रीय टीम काफी संतुलित नजर आती है। इसमें 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों को शामिल किया गया है। टीम के प्रमुख चेहरों में राम माधव, लोकसभा सांसद डी पुरंदेश्वरी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत शामिल हैं। साथ ही, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, बैजयंत पांडा और रेखा वर्मा को भी उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है।
संगठनात्मक मोर्चे पर बीएल संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर फिर से जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को भी राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। टीम में विनोद तावड़े और सुनील बंसल अपनी पुरानी भूमिका में बने हुए हैं। राष्ट्रीय सचिवों की 16 सदस्यीय टीम में भी कई युवा और नए चेहरों को मौका दिया गया है।
क्या विस्तार अपरिहार्य है?
अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा के किसी आधिकारिक प्रवक्ता ने कैबिनेट विस्तार की किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं की है, इसलिए कोई भी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। फिर भी, यदि हम वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रमों का विश्लेषण करें, तो एक स्पष्ट तस्वीर उभरती है। संसद का मानसून सत्र समाप्त हो चुका है, पार्टी की नई टीम काम में जुट गई है, कई मंत्री संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर भेजे जा चुके हैं, और अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव सरकार को नई सक्रियता के लिए मजबूर कर रहे हैं। इन सभी बिंदुओं को मिलाकर देखें तो कैबिनेट का विस्तार पहले की तुलना में अधिक संभव दिखाई देता है।
https://hindi.news18.com/news/nation/cabinet-expansion-reshuffle-talks-intensify-piyush-goyal-becomes-treasurer-ws-l-10757905.html