इस्तीफा स्वीकार करने की फिर से मांग
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रहे शहजाद पूनवाला ने एक बार फिर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपना इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को टैग किया और अनुरोध किया कि उनके द्वारा सौंपे गए त्यागपत्र को जल्द से जल्द स्वीकार किया जाए। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब कुछ समय पूर्व उन्होंने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से हटने का निर्णय लिया था, लेकिन उस समय भाजपा ने उनका इस्तीफा मंजूर करने के बजाय उनसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।
लंबे चिंतन के बाद लिया निर्णय
शहजाद पूनवाला ने 17 अगस्त को नितिन नबीन को संबोधित करते हुए एक नया पत्र लिखा और इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक की। उन्होंने अपने संदेश में उल्लेख किया है कि उन्होंने अत्यंत विनम्रता और आभार के साथ यह कदम उठाया है। पूनवाला ने स्पष्ट किया कि 30 जुलाई को उन्होंने पहली बार बिना शर्त इस्तीफा देने की पेशकश की थी। पार्टी के अनुरोध पर उन्होंने मामले को दोबारा सोचा, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं के बाद, जिनका जिक्र उन्होंने विस्तार से पार्टी नेतृत्व के सामने किया है, वे अपने पुराने फैसले पर अडिग रहने के लिए विवश हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लंबे और गहरे मंथन के बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद और भाजपा की सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से मुक्त होने का अंतिम निर्णय ले लिया है।
शीर्ष नेतृत्व के प्रति जताया आभार
अपने विदाई संदेश में शहजाद पूनवाला ने भाजपा के दिग्गज नेताओं के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महासचिव बीएल संतोष का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने उन्हें जो सम्मान, स्नेह और अवसर दिए, उसके लिए वे आजीवन ऋणी रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पिछले पांच साल में पार्टी ने उन्हें जो मंच प्रदान किया, वह उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने किसी भी प्रकार की कड़वाहट से इनकार करते हुए पूरी विनम्रता के साथ नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है।
निजी और आर्थिक कारणों का हवाला
पूनवाला ने स्पष्ट किया है कि उनके इस इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि पूर्णतः आर्थिक और व्यक्तिगत मजबूरियां हैं। उन्होंने बताया कि अपनी जरूरतों को देखते हुए अब वे निजी क्षेत्र में अपनी पारी शुरू करने जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भरोसा दिलाया है कि वे एक निजी नागरिक के रूप में भी प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी के विजन के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि जहां भी संभव होगा, वे पार्टी के मिशन का समर्थन करना जारी रखेंगे।
विचारधारा के प्रति अडिग रहने का दावा
अपने पोस्ट में उन्होंने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया कि व्यवस्था छोड़ने का मतलब पार्टी की विचारधारा से दूरी बनाना नहीं है। उन्होंने लिखा, मैं सिर्फ व्यवस्था छोड़ रहा हूं, व्यक्ति या विचार नहीं। इस कथन के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे वैचारिक रूप से अभी भी भाजपा के साथ जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि उनके जैसे व्यक्ति के लिए, जो एक गैर-राजनीतिक और पसमांदा मुस्लिम परिवार से आते हैं, भाजपा जैसी पार्टी में ऐसा मंच पाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने इसे एक ऐसी कहानी बताया जो केवल भारत में ही संभव हो सकती है।
विकसित भारत के मिशन के प्रति प्रतिबद्धता
अंत में, शहजाद पूनवाला ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को विकसित बनाने और महान बनाने का जो सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देखा है, वह निरंतर जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से अब पार्टी के पद पर न रहकर भी इस मिशन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेंगे। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह सफर और अधिक जोश और जुनून के साथ आगे बढ़ता रहेगा। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और स्नेह को अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है।
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