पलामू की अमितु सिंह की सफलता की कहानी: विपरीत परिस्थितियों से लड़कर बनीं RIMS में डॉक्टर

झारखंड के पलामू की रहने वाली अमितु सिंह ने पारिवारिक बाधाओं को पार करते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। आज वह RIMS में सीनियर रेजिडेंट के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।

संघर्षों को दी मात

पलामू की रहने वाली डॉ. अमितु सिंह की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। अपने परिवार की रूढ़िवादी सोच और सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टर बनने के अपने संकल्प को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। तमाम पारिवारिक झिझकों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अंततः सफलता का स्वाद चखा।

शिक्षा और करियर का सफर

अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान उन्होंने BDS और MDS की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने एक सीनियर लेक्चरर के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में न केवल किताबी ज्ञान को आत्मसात किया, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर भी लागू किया।

सामाजिक सरोकार और सेवाभाव

मेदिनीनगर में अपना निजी क्लिनिक चलाते हुए डॉ. अमितु ने न केवल मरीजों का इलाज किया, बल्कि उन लोगों की भी मदद की जो आर्थिक रूप से कमजोर थे। उन्होंने जरूरतमंद मरीजों का कम खर्च में इलाज सुनिश्चित किया और कई बार तो नि:शुल्क सेवा भी प्रदान की। उनकी इस मानवतावादी सोच ने उन्हें अपने क्षेत्र में काफी सम्मान दिलाया।

RIMS में नई भूमिका

उनकी कड़ी मेहनत और अनुभव का ही परिणाम है कि साल 2026 में उन्होंने RIMS के पेडोडॉन्टिक्स विभाग में सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्यभार संभाला। आज वह इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनकर न केवल मरीजों का इलाज कर रही हैं, बल्कि अपने क्षेत्र में एक सफल डॉक्टर के रूप में अपनी धाक जमा चुकी हैं।

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