दिमागी नक्सल पर छिड़ी सियासी जंग: किरेन रिजिजू ने बताई परिभाषा, तो पी. चिदंबरम ने दिया करारा जवाब

स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए दिमागी नक्सल शब्द को लेकर राजनीति गर्मा गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस शब्द का अर्थ स्पष्ट किया है, जबकि पी. चिदंबरम ने इसे अपने ऊपर लेते हुए तंज कसा है।

दिमागी नक्सल पर राजनीतिक घमासान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए गए संबोधन के बाद से ही दिमागी नक्सल शब्द को लेकर देश में एक नई बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देश के लिए एक नई चुनौती का संकेत दिया, जिसे उन्होंने दिमागी नक्सल करार दिया। इस बयान के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक विवादास्पद बयान दिया है, जिससे बीजेपी ने उन पर सीधा हमला बोला है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री का इशारा विपक्षी नेताओं की ओर नहीं था।

क्या बोले थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की बड़ी उपलब्धियों को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा कि देश ने उन नक्सलियों पर काफी हद तक काबू पा लिया है जो हथियार उठाकर जंगलों में हिंसा फैला रहे थे। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने चेताया कि बंदूक के दम पर लड़ने वाले नक्सली कमजोर जरूर हुए हैं, लेकिन उनकी विचारधारा को मानने वाले लोग अब भी सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री ने इन्हें दिमागी नक्सल का नाम दिया। उन्होंने कहा कि ये लोग लगातार अवसर की तलाश में रहते हैं और देश को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने देश से अपील की कि ऐसे लोगों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें अलग-थलग करना आवश्यक है।

चिदंबरम का पलटवार और बीजेपी की नाराजगी

प्रधानमंत्री के इस भाषण के ठीक अगले दिन कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर उन पर दिमागी नक्सल होने का ठप्पा लगाया जा रहा है, तो उन्हें इस पर गर्व है। चिदंबरम के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी। बीजेपी नेताओं ने चिदंबरम के बयान को हाथोंहाथ लिया और उन पर तथा कांग्रेस पार्टी पर नक्सलवाद के प्रति नरमी बरतने का आरोप मढ़ दिया। बीजेपी ने सवाल खड़ा किया कि आखिर प्रधानमंत्री के बयान को चिदंबरम ने अपने ऊपर क्यों लिया और वे क्यों इस विचारधारा के बचाव में उतर आए हैं।

किरेन रिजिजू ने स्पष्ट की स्थिति

बढ़ते विवाद को देखते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्थिति को साफ करने की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए विस्तार से समझाया कि दिमागी नक्सल शब्द किन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया है। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री का संकेत विपक्षी नेताओं की ओर बिल्कुल नहीं था। उन्होंने उन वर्गों की एक सूची गिनाई जिन्हें वे इस श्रेणी में देखते हैं। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि इसमें वे लोग शामिल हैं जो माओवादी विचारधारा का समर्थन करते हैं, जो भारतीय संविधान को नकारते हैं और अलगाववादी ताकतों का साथ देते हैं।

किन लोगों पर लागू होती है ये परिभाषा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन बिंदुओं को रेखांकित किया है जो दिमागी नक्सल की परिभाषा में आते हैं। उनके मुताबिक:

  • जो लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से माओवाद का समर्थन करते हैं।
  • जो भारतीय संविधान के प्रावधानों को अस्वीकार करते हैं।
  • जो देश की एकता के खिलाफ काम करने वाले अलगाववादियों के साथ खड़े नजर आते हैं।
  • जो अनुच्छेद 370 के समर्थन में तर्क देते हैं।
  • वे लोग जो भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को शेष देश से अलग करने के लिए चिकन नेक जैसे गलियारे को काटने की धमकी देते हैं या उसकी बात करते हैं।

किरेन रिजिजू ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग राष्ट्र की अखंडता के लिए खतरा पैदा करने वाली ऐसी विचारधारा रखते हैं, उन्हें ही दिमागी नक्सल कहा गया है। यह स्पष्टीकरण अब इस पूरी बहस का मुख्य बिंदु बन गया है, जहां अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में राजनीतिक दल इस पर क्या रुख अपनाते हैं।

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