बलोचिस्तान ने खुद को किया आजाद, पाकिस्तान ने खुजदार में थोपा लॉकडाउन

पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं, जहां लोगों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी है, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने पूरे इलाके में सख्त लॉकडाउन और सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।

बलोचिस्तान में स्वतंत्रता का बिगुल और पाकिस्तान की बौखलाहट

पाकिस्तान इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। एक ओर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जनता का गुस्सा सरकार के खिलाफ सड़कों पर है, तो वहीं दूसरी ओर बलोचिस्तान में विद्रोह की लपटें तेज हो गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि बलोचिस्तान के लोगों ने अपनी आजादी की तारीख घोषित करते हुए स्वतंत्रता दिवस मना लिया है, जिसने पाकिस्तानी हुकूमत की नींद उड़ा दी है। इस बगावत को दबाने के लिए अब पाकिस्तानी सेना ने ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

खुजदार में लॉकडाउन और आम जनजीवन पर असर

बलोचिस्तान में बढ़ती अशांति और सैन्य अभियानों के बीच, पाकिस्तानी प्रशासन ने खुजदार शहर में अनिश्चितकालीन लॉकडाउन लागू कर दिया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि बिना किसी बेहद जरूरी काम के घर से बाहर निकलने पर पूर्ण पाबंदी रहेगी और आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम के कारण पूरे इलाके में सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो चुका है। बाजार बंद हैं, परिवहन सेवाएं रोक दी गई हैं और लोगों को भोजन व दवाइयों जैसी बुनियादी चीजों के लिए भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। नागरिक खुद को घरों में कैद महसूस कर रहे हैं और बाहर निकलते ही उन्हें सुरक्षा बलों की सख्ती का सामना करना पड़ रहा है।

सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों का खौफ

पाकिस्तानी सेना ने न केवल खुजदार बल्कि खारान, जेहरी, कालात, मूला और जियारत जैसे कई क्षेत्रों में जमीनी और हवाई हमले तेज कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो खारान जिले के लिज्जे इलाके में थल सेना के साथ-साथ हेलीकॉप्टर और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सैन्य अभियानों में नागरिकों के मारे जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिनमें एक किसान की ड्रोन हमले में मौत का मामला चर्चा में है। हालांकि सेना का तर्क है कि वे केवल संदिग्ध उग्रवादियों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सैन्य कार्रवाई की आड़ में आम नागरिकों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

बीएलए का बढ़ता हमला और संसाधन संकट

इस बीच, बलूच लिबरेशन आर्मी ने अपनी विद्रोही गतिविधियों में तेजी ला दी है। संगठन ने पिछले एक सप्ताह के भीतर कुल 38 हमलों की जिम्मेदारी ली है और यह दावा किया है कि इन मुठभेड़ों में पाकिस्तानी सेना के 32 जवानों को मार गिराया गया है। विद्रोहियों ने क्वेटा और अन्य पांच जिलों को गैस पहुंचाने वाली एक प्रमुख 18 इंच की पाइपलाइन को उड़ा दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में गैस की किल्लत बढ़ गई है। संसाधनों के वितरण में असमानता और अपने अधिकारों के हनन से खफा जनता के लिए यह और भी बड़ी मुसीबत बन गया है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने प्रांत में ब्लैक डे मनाते हुए विरोध का आह्वान किया है, जिसके बाद से सुरक्षा बल हाई अलर्ट मोड पर हैं।

इंटरनेट ठप और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष

पूरे बलोचिस्तान में संचार साधनों और इंटरनेट सेवाओं को कई स्थानों पर बंद कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोग पूरी दुनिया से कट गए हैं। बावजूद इसके, युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्गीय नागरिकों का विरोध प्रदर्शन थम नहीं रहा है। बलूच यकजहती कमेटी जैसे संगठनों ने मुख्य सड़कों पर डेरा डाल दिया है और वे लापता लोगों की बरामदगी, सेना की हिंसा पर रोक और बुनियादी मानवाधिकारों की बहाली की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सरकार द्वारा फायरिंग और गिरफ्तारियों के इस्तेमाल ने आग में घी का काम किया है। अब बलूच नागरिक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील कर रहे हैं और वे चाहते हैं कि विश्व उनके मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाए और उन्हें एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता प्रदान करे।

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