सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों की पेंशन में अंतर
सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए तो समय-समय पर पेंशन से जुड़ी कई योजनाएं आती रहती हैं। सरकारी कर्मचारियों के पास NPS और UPS जैसी योजनाओं के विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, इसके विपरीत प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की स्थिति काफी अलग है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को अपनी सेवानिवृत्ति के बाद की वित्तीय सुरक्षा के लिए आज भी मुख्य रूप से EPS यानी एम्पलॉयी पेंशन स्कीम पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार, भविष्य निधि खाताधारकों के लिए वर्तमान में बेसिक सैलरी की सीमा 15,000 रुपये तय की गई है। इसी सैलरी सीमा के आधार पर पीएफ खाते में योगदान काटा जाता है और इसी के अनुसार रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी तय होती है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर किसी कर्मचारी ने लगातार 20 साल तक नौकरी की है और उसका योगदान 15,000 रुपये की सैलरी पर आधारित रहा है, तो उसे अंत में कितनी पेंशन मिलेगी।
20 साल की नौकरी करने वालों को मिलेगा 2 साल का बोनस
अगर आपने निजी क्षेत्र में अपनी नौकरी के 20 साल पूरे कर लिए हैं, तो आपके लिए EPFO की तरफ से एक बेहतरीन खबर है। EPS के नियमों के तहत, जो कर्मचारी 20 साल या उससे अधिक समय तक पीएफ खाते में अपना योगदान जारी रखते हैं, उन्हें पेंशन की गणना के दौरान एक विशेष लाभ दिया जाता है। EPFO ऐसे कर्मचारियों को सेवा अवधि में दो साल का अतिरिक्त बोनस यानी सर्विस वेटेज प्रदान करता है।
सरल शब्दों में समझें तो, यदि आपकी वास्तविक नौकरी की अवधि 20 साल है, तो पेंशन की गणना करते समय EPFO इसे 22 साल मानकर चलेगा। इस दो साल के बोनस का सीधा असर आपकी हर महीने मिलने वाली पेंशन राशि पर पड़ता है और पेंशन का फंड बढ़ जाता है।
क्या है पेंशन पाने का पात्रता नियम और बोनस का प्रावधान?
EPFO के नियमों के तहत पेंशन का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- पेंशन का हकदार बनने के लिए किसी भी कर्मचारी को कम से कम 10 साल की पेंशन-योग्य सेवा पूरी करना अनिवार्य है।
- यदि कोई कर्मचारी 10 साल से पहले ही नौकरी छोड़ देता है, तो वह पेंशन का हकदार नहीं होता, हालांकि वह जमा राशि को वापस निकाल सकता है।
- लंबे समय तक योगदान देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए बोनस का नियम बनाया गया है। इसके तहत जैसे ही योगदान की अवधि 20 साल या उससे अधिक होती है, कुल सेवाकाल में 2 साल का बोनस जोड़ दिया जाता है।
जानिए किस फॉर्मूले से तय होती है आपकी मंथली पेंशन
EPFO के नियमों के अनुसार, पेंशन की गणना करने के लिए एक निश्चित और पारदर्शी फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। यह फॉर्मूला इस प्रकार है:
महीने की पेंशन = (पेंशन के योग्य सैलरी × पेंशन के योग्य सर्विस) ÷ 70
इस फॉर्मूले को ठीक से समझने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले शब्दों का अर्थ जानना जरूरी है:
- पेंशन के योग्य सैलरी: इसका मतलब आपकी नौकरी के आखिरी 60 महीनों के दौरान की औसत बेसिक सैलरी से है। वर्तमान नियमों के तहत इसे अधिकतम 15,000 रुपये पर सीमित किया गया है।
- पेंशन के योग्य सर्विस: इसका अर्थ है कि आपने EPS में कुल कितने वर्षों तक अपना योगदान दिया है। इसमें 20 साल पूरे होने पर मिलने वाला 2 साल का बोनस भी जोड़ा जाता है।
उदाहरण से समझें: 15,000 रुपये की सैलरी पर कितनी बनेगी पेंशन?
मान लेते हैं कि एक निजी कर्मचारी की पेंशन-योग्य सैलरी अधिकतम सीमा यानी 15,000 रुपये है और उसने कुल 20 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं।
नियम के अनुसार, चूंकि कर्मचारी ने 20 साल की नौकरी पूरी कर ली है, इसलिए उसे 2 साल का अतिरिक्त बोनस मिलेगा। इस प्रकार उसकी कुल पेंशन-योग्य सर्विस अब 22 साल (20 साल + 2 साल बोनस) मानी जाएगी।
अब यदि हम इस डेटा को EPFO के पेंशन फॉर्मूले में रखते हैं, तो गणना कुछ इस तरह होगी:
- पेंशन = (15,000 × 22) ÷ 70
- पेंशन = 3,30,000 ÷ 70
- कुल पेंशन = 4,714 रुपये प्रति महीना
इस तरह, इस खास नियम की बदौलत उस कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद हर महीने करीब 4,714 रुपये की पेंशन प्राप्त होगी। यदि यह 2 साल का बोनस नहीं मिलता, तो पेंशन की राशि केवल 4,285 रुपये होती। यानी इस बोनस नियम के कारण कर्मचारी को हर महीने 429 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।
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