जिम्बाब्वे: करीबा झील में नाव पलटने से 72 लोगों की मौत, क्षमता से कहीं अधिक यात्री थे सवार

जिम्बाब्वे में एक भीषण नाव हादसे में 72 लोगों की जान चली गई, जिसमें 18 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। यह फेरी अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं ज्यादा यात्रियों को लेकर यात्रा कर रही थी।

हादसे की भयावहता

जिम्बाब्वे में एक दर्दनाक समुद्री हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। करीबा झील में इस सप्ताह एक ओवरलोडेड फेरी के पलट जाने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 72 तक पहुंच गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस त्रासदी में 18 बच्चे भी असमय काल के गाल में समा गए। शनिवार को बचाव दलों द्वारा कई और शवों के बरामद किए जाने के बाद पुलिस ने आधिकारिक रूप से 72 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की है। यह नाव हादसा मंगलवार को तेज लहरों के बीच हुआ था। पुलिस ने बताया कि हाल ही में 26 और शव पानी से निकाले गए, जिससे मरने वालों का कुल आंकड़ा 72 पर स्थिर हो गया है। इससे पहले इस महीने इंडोनेशिया में भी नाव में आग लगने की एक बड़ी घटना सामने आई थी।

क्षमता से अधिक भार और अव्यवस्था

यह पुरानी फेरी करिबा शहर से उत्तर-पश्चिमी इलाके के उन ग्रामीण और मछली पकड़ने वाले समुदायों की ओर जा रही थी, जहां बुनियादी सड़कों का अभाव है और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था बहुत कमजोर है। यह नाव एक सरकारी एजेंसी के माध्यम से संचालित की जा रही थी। इस फेरी का मुख्य उपयोग करिबा झील के किनारे बसे दूरदराज के इलाकों के लोगों को मुख्य शहर करिबा तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। अधिकारियों ने हालांकि शुरुआत में कुल सवार यात्रियों और लापता लोगों की स्पष्ट संख्या का खुलासा नहीं किया था, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि यह नाव भारी ओवरलोडिंग की शिकार थी।

77 यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फेरी की कुल निर्धारित क्षमता 90 लोगों की थी, लेकिन उस पर सवार यात्रियों की संख्या 153 के आसपास होने का अनुमान जताया गया है। जिम्बाब्वे की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने जानकारी दी है कि बचाव कार्य के दौरान 77 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। इन लोगों को झील के एक छोटे से द्वीप पर ले जाया गया और बाद में विशेष नौकाओं के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया। बच्चों की वास्तविक संख्या का पता लगाना मुश्किल था, क्योंकि टिकट बुक करते समय एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को यात्रियों की आधिकारिक सूची में नहीं जोड़ा जाता था। बाद में पुलिस द्वारा जारी सूची से स्पष्ट हुआ कि मरने वाले 16 बच्चे 10 साल या उससे कम उम्र के थे, जिनमें से एक बच्चा केवल 1 वर्ष का था।

करीबा झील का भूगोल

करिबा झील दुनिया की सबसे विशाल मानव निर्मित झील मानी जाती है। इसका निर्माण 1950 के दशक के अंतिम वर्षों और 1960 के दशक की शुरुआत में जम्बेजी नदी पर बांध बनाकर किया गया था। यह झील लगभग 200 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है और कुछ स्थानों पर इसकी चौड़ाई 40 किलोमीटर तक है। जिम्बाब्वे और जाम्बिया इस झील के साझेदार हैं और दोनों देशों की सीमा इस झील के मध्य से होकर गुजरती है।

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