छतरपुर की मशहूर पोई भाजी का स्वाद
मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की पारंपरिक सब्जियां भी काफी लोकप्रिय हैं। इनमें पोई भाजी का अपना एक अलग महत्व है। स्थानीय स्तर पर यह भाजी अपने अनूठे स्वाद और जबरदस्त सेहत लाभ के कारण घरों की पहली पसंद बनी हुई है। बारिश के मौसम में इस भाजी की मांग और उत्पादन दोनों ही बढ़ जाते हैं।
बरेजा तकनीक का महत्व
इस भाजी की खेती करने का तरीका बेहद अनोखा है। इसे आमतौर पर पान के बरेजा में तैयार किया जाता है। इसका पौधा एक बेल के रूप में बढ़ता है, जिसे सहारा देने के लिए रस्सियों का उपयोग किया जाता है। बेलें रस्सियों के सहारे ऊपर की ओर फैलती हैं, जिससे इन्हें पर्याप्त हवा और प्रकाश मिलता रहता है। आप भी यदि घर पर इसे उगाना चाहते हैं, तो रस्सियों के माध्यम से एक ढांचा तैयार कर आसानी से इसे लगा सकते हैं।
कैसे तैयार करें पोई भाजी की सब्जी
पोई भाजी को बनाने की विधि अन्य हरी सब्जियों से काफी अलग है। अक्सर लोग हरी पत्तेदार सब्जियों की पत्तियों का उपयोग करते हैं, लेकिन पोई भाजी के मामले में ऐसा नहीं है। इसके बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
- इसमें पत्तियों के बजाय इसके कोमल डंठलों का इस्तेमाल किया जाता है।
- सब्जी बनाने से पहले इन डंठलों को सावधानीपूर्वक छीलना पड़ता है।
- छीलने के बाद तैयार किए गए डंठल स्वाद में लाजवाब होते हैं और सेहत के लिए भी अत्यधिक फायदेमंद माने जाते हैं।
यदि आप बारिश के दौरान अपने घर पर ही कुछ पौष्टिक और पारंपरिक उगाना चाहते हैं, तो छतरपुर की यह मशहूर पोई भाजी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। इसे लगाने में न केवल मेहनत कम लगती है, बल्कि यह बहुत कम जगह में भी आसानी से तैयार हो जाती है।
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