दिल्ली में सियासी घमासान
राजधानी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक गंभीर राजनीतिक रार का रूप ले चुका है। शनिवार, 15 अगस्त 2026 को आयोजित इस ध्वजारोहण कार्यक्रम में वंदे मातरम के गायन के समय सोनिया गांधी के हावभाव और उनके द्वारा स्थान परिवर्तन करने के वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया है। इस घटना को लेकर दोनों दलों के बीच आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर जारी है।
कांग्रेस की सफाई और प्रशासनिक तर्क
विवाद बढ़ता देख कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने पार्टी का पक्ष रखते हुए पूरे मामले को एक प्रशासनिक आवश्यकता बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम के गायन को लेकर पार्टी के भीतर कोई भी विवाद नहीं था। तारिक अनवर के अनुसार, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भीषण गर्मी और तेज धूप में लगभग 15 मिनट से लगातार खड़े थे। उनकी उम्र को देखते हुए सोनिया गांधी ने उनके लिए कुर्सी मंगाने का निर्देश दिया था ताकि वे बैठ सकें। उन्होंने इसे राई का पहाड़ बनाने की संज्ञा देते हुए भाजपा पर बेवजह का मुद्दा तूल देने का आरोप लगाया।
भाजपा का पलटवार और नक्सली मानसिकता का आरोप
कांग्रेस की सफाई के बाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बेहद तीखे अंदाज में निशाना साधा। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि मामला केवल कुर्सी मंगाने का था, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चेहरे पर स्पष्ट रूप से गुस्सा क्यों दिख रहा था। प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता अक्सर यह तर्क देते हैं कि पूरा वंदे मातरम नहीं गाया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आज की कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से नक्सली मानसिकता से ग्रसित हो चुकी है और अब यह वास्तविक इंडियन नेशनल कांग्रेस नहीं रही। भाजपा ने इस घटना को राष्ट्रगीत के प्रति अनादर की श्रेणी में रखा है।
क्या कानूनी कार्रवाई का बनेगा आधार?
इस सियासी बहस के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह विवाद केवल बयानों तक सीमित रहेगा या अदालत और पुलिस की चौखट तक पहुंचेगा। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सार्वजनिक अथवा राजनीतिक कार्यक्रम में वंदे मातरम के गायन को जानबूझकर बाधित किया जाता है या उसमें विघ्न डाला जाता है, तो विरोधी पक्ष इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यदि इस मुद्दे पर कोई जनहित याचिका या आपराधिक शिकायत दायर की जाती है, तो न्यायालय को यह जांचना होगा कि क्या इसमें राष्ट्रगीत के प्रति अनादर का स्पष्ट इरादा था या यह केवल एक प्रशासनिक समन्वय में आई कमी का परिणाम था।
राष्ट्रीय सम्मान कानून 2026 के प्रावधान
इस पूरे मामले की गंभीरता इसलिए भी अधिक है क्योंकि हाल ही में संसद द्वारा राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) कानून, 2026 पारित किया गया है। इस नए अधिनियम के अंतर्गत ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समकक्ष कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। कानून के नए प्रावधानों के अनुसार:
- वंदे मातरम के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना या बाधा उत्पन्न करना एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
- दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
- गृह मंत्रालय के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार, आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान एक साथ गाए जाने पर वंदे मातरम को पहले प्राथमिकता दी जाएगी।
- कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के लिए सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य है।
असंतोष और भविष्य की राह
स्वतंत्रता प्राप्ति के 80वें वर्ष में केंद्र सरकार राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। कांग्रेस मुख्यालय की इस हालिया घटना के बाद भाजपा लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है। हालांकि कांग्रेस ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण दे दिया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह विवाद अदालती गलियारों तक भी खिंच सकता है। फिलहाल, इस बात पर संशय बना हुआ है कि क्या यह सियासी संग्राम शांत होगा या कोई कानूनी मोड़ लेगा।
https://hindi.news18.com/news/nation/vande-mataram-recitation-controversy-congress-bjp-politics-what-is-new-law-police-court-cases-10752733.html