स्वतंत्रता दिवस संबोधन: लाल किले से सबसे लंबा भाषण देने वाले प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए अपने भाषणों की अवधि के मामले में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कम बार संबोधन करने के बावजूद, कुल भाषण समय और औसत अवधि में वे शीर्ष पर हैं।

लाल किले से भाषण की नई इबारत

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के प्रधानमंत्री का लाल किले की प्राचीर से दिया जाने वाला संबोधन केवल एक रस्म नहीं होता, बल्कि यह देश की भविष्य की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जब हम इन भाषणों के इतिहास और उनकी अवधि का विश्लेषण करते हैं, तो एक नाम स्पष्ट रूप से सबसे आगे दिखाई देता है, और वह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामने आए ताजा आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि भाषण की लंबाई और कुल समय के मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सभी पूर्ववर्तियों को पीछे छोड़ दिया है।

औसत अवधि में मोदी का दबदबा

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी के अब तक के 13 स्वतंत्रता दिवस भाषणों की औसत अवधि लगभग 91 मिनट रही है। यह आंकड़ा अन्य प्रधानमंत्रियों के औसत समय की तुलना में काफी प्रभावशाली है। उदाहरण के लिए, पीवी नरसिम्हा राव के भाषणों की औसत अवधि 52 मिनट थी। इस प्रकार, प्रधानमंत्री मोदी का औसत भाषण समय नरसिम्हा राव की तुलना में भी 39 मिनट अधिक है। स्वतंत्रता दिवस के भाषणों की परंपरा पर गौर करें तो यह साफ दिखता है कि समय के साथ संबोधन की अवधि में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

पूर्व प्रधानमंत्रियों का रहा है यह रिकॉर्ड

ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से 17 बार राष्ट्र को संबोधित किया और उनके भाषणों की औसत अवधि करीब 24 मिनट थी। इसके बाद आने वाले प्रधानमंत्रियों की भाषण अवधि पर नजर डालें तो स्थिति इस प्रकार रही है:

  • इंदिरा गांधी: औसत 32 मिनट (कुल 16 भाषण)
  • राजीव गांधी: औसत 47 मिनट
  • अटल बिहारी वाजपेयी: औसत 30 मिनट
  • मनमोहन सिंह: औसत 42 मिनट (कुल 10 भाषण)
  • पीवी नरसिम्हा राव: औसत 52 मिनट

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि दशकों के अंतराल में लाल किले से दिए जाने वाले संदेशों की लंबाई में एक बड़ा और स्पष्ट बदलाव आया है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

कुल समय के मामले में भी आगे

केवल औसत अवधि ही नहीं, बल्कि कुल समय की गणना में भी प्रधानमंत्री मोदी ने लंबी छलांग लगाई है। अपने 13 संबोधनों में उन्होंने अब तक कुल 1,177 मिनट तक देश को संबोधित किया है। यह संख्या उनके पूर्ववर्तियों द्वारा लिए गए कुल समय से काफी ज्यादा है। यदि हम तुलना करें, तो इंदिरा गांधी ने अपने 16 भाषणों में कुल 504 मिनट, मनमोहन सिंह ने 10 भाषणों में 417 मिनट और जवाहरलाल नेहरू ने 17 भाषणों में लगभग 400 मिनट तक राष्ट्र को संबोधित किया था।

यह तथ्य वाकई दिलचस्प है कि भले ही जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना में अधिक बार लाल किले से झंडा फहराया और भाषण दिया, लेकिन कुल समय के लिहाज से प्रधानमंत्री मोदी का योगदान उन दोनों के कुल समय के योग से भी कहीं ज्यादा है। यह स्पष्ट करता है कि वर्तमान प्रधानमंत्री का संवाद करने का तरीका और उनकी प्राथमिकताओं का विस्तार पहले की सरकारों से काफी भिन्न और विस्तृत रहा है।

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