पुतिन ने की भारत की विकास यात्रा की तारीफ
भारत ने अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस विशेष अवसर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई संदेश भेजा है। रूस के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर साझा किए गए इस संदेश में पुतिन ने भारत की प्रगति का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में बेहद प्रभावशाली तरीके से आगे बढ़ रहा है। पुतिन ने वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करते हुए कहा कि आज विश्व मंच पर भारत का सम्मान बढ़ा है और देश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
रणनीतिक साझेदारी को मिली नई मजबूती
भारत और रूस के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच की साझेदारी विशेष रणनीतिक संबंधों पर आधारित है, जो निरंतर सफलता के साथ आगे बढ़ रही है। मॉस्को और नई दिल्ली कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। पुतिन ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), BRICS और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत और रूस के बीच गहरा समन्वय बना हुआ है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि भविष्य में दोनों देशों के साझा प्रयासों से न केवल दोनों देशों के नागरिकों को लाभ होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।
नॉर्दर्न सी रूट पर बढ़ी दोनों देशों की सक्रियता
रूस के राष्ट्रपति का यह बधाई संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत और रूस के बीच नॉर्दर्न सी रूट (NSR) के माध्यम से आपसी सहयोग को लेकर गहन चर्चा चल रही है। यह समुद्री मार्ग आर्कटिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और रूस इसे यूरोप और एशिया के मध्य एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि कनेक्टिविटी के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि कनेक्टिविटी भारत और रूस के बहुआयामी सहयोग का एक अभिन्न हिस्सा है और इस मार्ग से संबंधित विषयों पर दोनों देश लगातार संपर्क में हैं।
रणनीतिक दृष्टि से क्यों जरूरी है यह समुद्री मार्ग
भारत के लिए नॉर्दर्न सी रूट का महत्व रणनीतिक और व्यापारिक दोनों दृष्टियों से काफी अधिक है। यदि भारत इस मार्ग का प्रभावी उपयोग करता है, तो रूस के साथ व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। यह मार्ग पहले से मौजूद इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग जैसी योजनाओं के पूरक के रूप में काम कर सकता है। आर्कटिक क्षेत्र से होकर गुजरने वाला यह समुद्री मार्ग भविष्य में यूरोप और एशिया के बीच कम दूरी वाला एक प्रमुख व्यापारिक गलियारा साबित हो सकता है, जो भारत के समुद्री व्यापार को नई गति प्रदान करेगा।
नाविकों के प्रशिक्षण और आर्कटिक क्षेत्र पर विशेष फोकस
भारत ने समुद्री और आर्कटिक सहयोग के मामले में एक दीर्घकालिक रणनीति तैयार की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पूर्व में यह संकेत दे चुके हैं कि दोनों देश कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाएंगे। इस कड़ी में भारतीय नाविकों को आर्कटिक क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेविगेशन और समुद्री यात्रा का विशेष प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है। इससे आर्कटिक क्षेत्र में भारत की भागीदारी बढ़ेगी और वहां की गतिविधियों में भारत की क्षमता विकसित होगी। आर्कटिक क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है और यह मार्ग केवल व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे इस समुद्री मार्ग का व्यावसायिक उपयोग बढ़ रहा है, इसमें एशियाई बाजारों की रुचि भी निरंतर विकसित हो रही है, जिससे भारत के लिए भविष्य के अवसर और अधिक उज्ज्वल दिखाई देते हैं।
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