आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी की सबसे बुनियादी जरूरत बन चुका है। जो काम पहले घंटों में होते थे, वे अब चंद सेकंड में पूरे हो जाते हैं। मीलों दूर बैठे अपनों से संपर्क साधना अब बेहद आसान हो गया है। तकनीक के इस चमत्कार ने निश्चित रूप से दूरियों को कम किया है और इंसान के जीवन को रफ्तार दी है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू बेहद चिंताजनक है। जिस मोबाइल ने दुनिया की दूरियों को मिटाया, वही अब पति-पत्नी के बीच की दूरियों को बढ़ाने का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। मध्य प्रदेश के सागर जिले से जो आंकड़े और मामले सामने आ रहे हैं, वे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कैसे मोबाइल फोन वैवाहिक जीवन में जहर घोल रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि कहीं सगाई के बाद ही फोन व्यस्त आने पर शादी टूट रही है, तो कहीं शादी के महज एक महीने बाद ही बात तलाक तक पहुंच जा रही है।
सागर महिला थाने के आंकड़े कर रहे हैं हैरान
वैवाहिक रिश्तों में कड़वाहट घोलने वाले इस आधुनिक उपकरण को लेकर सागर के महिला थाने से बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 1 जनवरी 2026 से जुलाई 2026 के बीच महिला थाने में कुल 85 पारिवारिक विवाद के मामले दर्ज किए गए। इन दर्ज मामलों में से लगभग 22% मामले सीधे तौर पर मोबाइल फोन की वजह से टूटने वाले रिश्तों से संबंधित हैं। वहीं अगर पिछले ढाई साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 40 से भी ज्यादा शादियां केवल मोबाइल फोन की वजह से पैदा हुए संदेह और विवाद के कारण हमेशा के लिए टूट चुकी हैं।
शक की वजह: वीडियो कॉल, चैट और पल-पल की निगरानी
मोबाइल फोन के कारण दांपत्य जीवन में शक का दायरा इस कदर बढ़ गया है कि छोटी-छोटी बातें भी बड़े विवाद का रूप ले रही हैं। अक्सर मामलों में देखा गया है कि पति द्वारा पत्नी को किसी अनजान व्यक्ति से चैट करते हुए देख लेना, या पत्नी द्वारा पति को किसी अन्य व्यक्ति के साथ वीडियो कॉल पर बात करते हुए पकड़ लेना विवाद का कारण बनता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर तस्वीरें देखना, देर रात तक फोन पर व्यस्त रहना और पार्टनर के पूछने पर सही जवाब न देना भी रिश्तों में दरार डाल रहा है। लगातार फोन व्यस्त रहने की वजह से पति और पत्नी के मन में गहरा शक पैदा हो जाता है, जो अंततः न्यायालय और तलाक के दरवाजे तक जा पहुंचता है।
केस स्टडी 1: इंदौर का खुला माहौल और शादी के एक महीने बाद ही दरार
सागर महिला थाना प्रभारी संतोषी कनासिया ने इस समस्या को स्पष्ट करने के लिए कुछ वास्तविक मामलों का उदाहरण दिया है। उनके अनुसार, एक मामला सागर के ही एक युवक का है, जिसने एक ग्रामीण पृष्ठभूमि की युवती से विवाह किया था। हालांकि, युवती की पढ़ाई-लिखाई और जीवन के कुछ अहम साल इंदौर जैसे बड़े शहर में बीते थे। बड़े शहर के खुले माहौल में रहने के कारण वह स्वभाव से काफी मिलनसार और आधुनिक विचारों वाली थी। वह अक्सर अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त रहा करती थी।
शादी के अभी केवल एक महीने ही बीते थे कि पति-पत्नी के बीच इस मोबाइल व्यस्तता को लेकर गंभीर विवाद शुरू हो गया। पति को पत्नी के इस व्यवहार पर संदेह होने लगा, जिससे उनके हंसते-खेलते संसार में कड़वाहट आ गई। यह विवाद इतना बढ़ गया कि मामला महिला थाने तक पहुंच गया। पुलिस और परिवार के स्तर पर आपसी सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। इसके बाद करीब 6 से 7 महीने तक यह मामला कोर्ट में विचाराधीन रहा और आखिरकार दोनों के बीच कानूनी तौर पर तलाक हो गया।
केस स्टडी 2: 'फोन बिजी क्यों था?' और टूट गई सगाई
एक अन्य मामला यह दर्शाता है कि मोबाइल फोन केवल शादीशुदा जोड़ों के जीवन में ही नहीं, बल्कि होने वाले जीवनसाथियों के बीच भी जहर घोल रहा है। सागर के ही एक युवक और युवती का रिश्ता बड़ी धूमधाम से तय हुआ था। युवक भोपाल की एक निजी कंपनी में नौकरी करता था। दोनों की सगाई हो चुकी थी और शादी की तैयारियां चल रही थीं। सगाई के बाद स्वाभाविक रूप से दोनों के बीच फोन पर बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।
लेकिन यहीं से परेशानी भी शुरू हो गई। युवक जब भी भोपाल से युवती को कॉल करता, तो कई बार उसका फोन व्यस्त आता था। नंबर व्यस्त आने की वजह से दोनों के बीच तीखी बहस और अनबन शुरू हो गई। युवक बेहद शक्की मिजाज का होने लगा और वह युवती से उसके पल-पल की जानकारी मांगने लगा। वह लगातार सवाल पूछता था कि वह इस समय कहां है, किससे बात कर रही थी और फोन इतनी देर तक क्यों व्यस्त था। युवती को युवक की यह लगातार पूछताछ और शक करने की आदत बेहद नागवार गुजरी। उसे महसूस हुआ कि शादी से पहले ही जब इतना नियंत्रण और संदेह है, तो शादी के बाद जिंदगी कैसी होगी। इसी बात से तंग आकर युवती ने अपनी तरफ से शादी का यह रिश्ता हमेशा के लिए तोड़ दिया।
तकनीक का दुरुपयोग बिगाड़ रहा है सामाजिक ताना-बाना
समाजशास्त्रियों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन स्वयं में कोई समस्या नहीं है, बल्कि इसका अत्यधिक उपयोग और एक-दूसरे के प्रति घटता विश्वास असली समस्या है। दांपत्य जीवन की बुनियाद आपसी भरोसे और सम्मान पर टिकी होती है। जब पार्टनर एक-दूसरे को समय देने के बजाय स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिताने लगते हैं, तो बातचीत का अभाव होने लगता है। यही संवादहीनता आगे चलकर गलतफहमियों और शक को जन्म देती है। वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि लोग तकनीक का इस्तेमाल केवल जरूरत भर करें और अपने निजी रिश्तों को बचाने के लिए आपसी बातचीत और विश्वास को प्राथमिकता दें।
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