मानसून में बाहर का चटपटा खाना पड़ सकता है भारी, टाइफाइड और फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए बरतें ये सावधानियां

बरसात के मौसम में बाहर के खाने से जुड़ी छोटी सी लापरवाही आपको अस्पताल पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो दूषित पानी और खुला खाना संक्रमण का मुख्य जरिया है, जिससे टाइफाइड और फूड पॉइजनिंग का गंभीर खतरा बढ़ जाता है।

मानसून और सेहत का जोखिम

मानसून की झमाझम बारिश निश्चित रूप से भीषण गर्मी से राहत दिलाने का काम करती है, लेकिन अपने साथ यह स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आती है। इस मौसम में उमस और नमी के कारण बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक कीटाणुओं के पनपने की दर कई गुना बढ़ जाती है। सड़क किनारे मिलने वाले स्वादिष्ट व्यंजन जैसे कि गोलगप्पे, चाट, पकौड़े और समोसे मानसून के दौरान लोगों को काफी आकर्षित करते हैं। हालांकि, स्वाद के प्रति यह लगाव आपकी सेहत के लिए बहुत जोखिम भरा साबित हो सकता है। यदि साफ-सफाई के मानकों को नजरअंदाज किया जाए, तो बाहर का यही खाना पेट की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

खुले खाने और मक्खियों से सावधान

स्थानीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार (आयुष) के अनुसार, मानसून के दिनों में सबसे बड़ी चिंता उन खाद्य पदार्थों को लेकर होती है जिन्हें लंबे समय तक खुले वातावरण में छोड़ दिया जाता है। अक्सर सड़क किनारे लगने वाली छोटी दुकानों या ठेलों पर खाने-पीने की चीजें बिना ढके रखी होती हैं। इन पर धूल-मिट्टी के साथ-साथ गंदा पानी और मक्खियां बैठने की पूरी संभावना रहती है। बरसात में मक्खियों की सक्रियता बढ़ जाती है और ये अपने साथ विभिन्न प्रकार के घातक बैक्टीरिया लेकर आती हैं। यदि ये मक्खियां खाने की सामग्री पर बैठती हैं, तो कीटाणु भोजन को संक्रमित कर देते हैं, जिससे पेट में इन्फेक्शन होने का खतरा काफी अधिक हो जाता है।

गोलगप्पे और चाट पर बरतें एहतियात

सड़क किनारे मिलने वाले गोलगप्पे और चाट जैसे व्यंजनों में पानी की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है। अक्सर इन स्टॉल्स पर पानी को खुले बरतनों में रखा जाता है और एक ही पानी का इस्तेमाल काफी देर तक किया जाता है। यदि यह पानी दूषित है, तो इसके सेवन से डायरिया, उल्टी, पेट दर्द और गंभीर संक्रमण की समस्या होना आम बात है। लोग अक्सर यह सोचकर बेफिक्र रहते हैं कि समोसे या पकौड़े गर्म तेल में तले गए हैं, इसलिए वे सुरक्षित हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि यदि कच्ची सामग्री को ठीक से साफ नहीं किया गया है या तलने के बाद उन्हें असुरक्षित तरीके से खुले में रखा गया है, तो संक्रमण का डर बना रहता है। इसके अलावा, कई दुकानों पर एक ही तेल का बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वाद के साथ-साथ भोजन की गुणवत्ता को पूरी तरह खत्म कर देता है और शरीर में विषाक्त तत्व बढ़ाता है।

टाइफाइड और फूड पॉइजनिंग का खतरा

मानसून के दौरान दूषित खान-पान का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। टाइफाइड मुख्य रूप से संक्रमित पानी और भोजन के माध्यम से फैलने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। इसके अलावा, दूषित भोजन फूड पॉइजनिंग का कारण भी बनता है। फूड पॉइजनिंग होने पर व्यक्ति को तेज उल्टी, दस्त, पेट में असहनीय दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी कमजोर है, या फिर घर में छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं, तो ये बीमारियां और भी ज्यादा विकराल रूप धारण कर सकती हैं।

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी उपाय

इस मौसम में सेहतमंद बने रहने के लिए केवल बाहर के खाने से परहेज करना ही काफी नहीं है, बल्कि घरेलू खान-पान की स्वच्छता का ध्यान रखना भी अनिवार्य है। अपनी सुरक्षा के लिए निम्नलिखित बातों का पालन करें:

  • पीने के लिए हमेशा साफ, फिल्टर किया हुआ या जरूरत के हिसाब से उबला हुआ पानी ही इस्तेमाल करें।
  • सब्जियों और फलों को उपयोग में लाने से पहले अच्छी तरह साफ पानी से धोना सुनिश्चित करें।
  • बाहर से मंगाए गए भोजन को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखने से बचें, क्योंकि नमी के कारण इसमें जल्दी कीटाणु पनप सकते हैं।
  • सड़क किनारे खुले में बिकने वाली खाद्य वस्तुओं के सेवन से पूरी तरह परहेज करें।
  • अपनी और अपने परिवार की इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए घर का बना ताजा और हल्का भोजन ही प्राथमिकता दें।

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