अमरोहा के ये 5 जायके हैं बेहद खास, एक बार चखेंगे तो स्वाद कभी नहीं भूलेंगे

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में खाने-पीने की पांच ऐसी चीजें मशहूर हैं, जिनका स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। नान गोश्त से लेकर बिरयानी और आम तक, ये जायके शहर की अलग पहचान बन चुके हैं।

उत्तर प्रदेश का अमरोहा जनपद वैसे तो कई वजहों से जाना जाता है, लेकिन यहां के खान-पान की अपनी ही शान है। शहर में खाने-पीने की बहुत सी चीजें मिलती हैं, मगर पांच ऐसी हैं जो स्वाद के मामले में सबसे आगे हैं। इनका जायका लेने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं और इन्हें बेहद पसंद करते हैं। अमरोहा घूमने आने वाला हर शख्स इन चीजों का लुत्फ जरूर उठाता है।

शहर की पांच मशहूर चीजें

अमरोहा में जो पांच चीजें सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं, उनमें नान गोश्त और नल्ली निहारी, अमरोहा की मशहूर बिरयानी, लजीज पकौड़े और चाट, मटन पाया और कीमा तथा अमरोहा के आम शामिल हैं। ये सभी शहर की खास पहचान बन चुकी हैं और इनकी मांग दूर-दूर तक रहती है। यही वजह है कि अमरोहा आने वाला हर कोई इन जायकों का स्वाद जरूर चखता है।

नान गोश्त — तंदूर की खुशबू वाली शाही डिश

खान-पान के क्षेत्र में अमरोहा की अलग पहचान है और यहां का नान गोश्त तथा नल्ली निहारी खाने के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। सुबह से लेकर देर रात तक यहां की गलियां गोश्त और मसालों की खुशबू से महकती रहती हैं। यह शहर की सबसे मशहूर डिश है। मिट्टी के तंदूर में सिकी गरमागरम नान ऊपर से करारी और अंदर से रुई जैसी नरम होती है, जिस पर लगा देसी घी और कलौंजी स्वाद को और बढ़ा देते हैं।

गोश्त को देसी घी, खड़े मसाले, भुना प्याज, दही और लहसुन-अदरक के साथ बड़ी देग में धीमी आंच पर 4 से 5 घंटे तक पकाया जाता है। ग्रेवी इतनी गाढ़ी और दानेदार होती है कि नान पर लपेटते ही चिपक जाती है। बकरे का गोश्त इस कदर गल जाता है कि हड्डी खुद-ब-खुद अलग हो जाती है। हर निवाले में तीखा, चटपटा और शाही जायका मिलता है।

नल्ली निहारी — सुबह की शान

निहारी अमरोहा की सुबह की पहचान है। बड़े की नल्ली और गोश्त को रातभर कोयले की धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसमें सोंठ, सौंफ, पीपली, जावित्री और खास निहारी मसाला मिलाया जाता है। 8 से 10 घंटे पकने के बाद ग्रेवी गाढ़ी हो जाती है और ऊपर सुनहरा तेल तैरने लगता है।

इसे खमीरी रोटी, कुलचा या शीरमाल के साथ खाया जाता है। परोसते वक्त ऊपर से बारीक कटा अदरक, हरी मिर्च, हरा धनिया और नींबू डाला जाता है। एक चम्मच मुंह में जाते ही सारा स्वाद घुल जाता है, और सर्दियों में तो इसका आनंद दोगुना हो जाता है।

अमरोहा की बिरयानी — तहजीब और विरासत का हिस्सा

अमरोहा की बिरयानी महज एक डिश नहीं, बल्कि यहां की तहजीब और खानपान की विरासत का हिस्सा है। अपने अनोखे जायके, खुशबू और बनाने के तरीके के कारण यह दूर-दूर तक मशहूर है। लखनवी और मुरादाबादी बिरयानी से इसका अंदाज थोड़ा अलग और खास है। यहां की बिरयानी असली दम पुख्त तरीके से तैयार होती है। सबसे पहले बकरे के गोश्त को दही, अदरक-लहसुन के पेस्ट, हरी मिर्च, तले हुए प्याज, केवड़ा जल, गुलाब जल और खास गरम मसालों में 5 से 6 घंटे तक मैरिनेट किया जाता है, जिससे गोश्त रसीला और खुशबूदार बन जाता है।

लंबे दाने वाले बासमती चावल को तेज पत्ते, दालचीनी और नमक के साथ आधा उबाला जाता है। इसके बाद बड़ी तांबे की देग में नीचे मैरिनेट किया हुआ गोश्त और ऊपर आधे पके चावल की परत बिछाई जाती है। बीच में तला प्याज, पुदीना, केसर वाला दूध और देसी घी डाला जाता है। देग का मुंह आटे से सील करके कोयले की धीमी आंच पर दम दिया जाता है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका हल्का सुनहरा पीला रंग और ऐसी भीनी खुशबू, जो गली में आते ही भूख बढ़ा दे। चावल का हर दाना खिला हुआ होता है और गोश्त इतना नरम कि हड्डी से खुद अलग हो जाए। इसमें मिर्च और तेल कम होता है, फिर भी जायका पूरा शाही मिलता है। हर निवाले में केवड़े और गरम मसाले का स्वाद घुला रहता है।

पकौड़े और चाट — हर किसी की पसंद

अमरोहा के पकौड़े और चाट का स्वाद पूरे इलाके में मशहूर है। यहां के आलू, पालक और पनीर के पकौड़े बेसन में अजवाइन और हींग डालकर कुरकुरे तले जाते हैं और इन्हें हरी चटनी तथा इमली की खट्टी-मीठी चटनी के साथ गरमागरम परोसा जाता है। यहां की आलू टिक्की चाट और दही भल्ले की बात ही अलग है। आलू टिक्की को करारा सेंककर उस पर दही, हरी चटनी, मीठी चटनी, चाट मसाला और सेव डाला जाता है, जबकि दही भल्ले मुंह में जाते ही घुल जाते हैं। मंडी चौक और रेलवे रोड की पुरानी दुकानों पर शाम के वक्त खूब भीड़ जुटती है। तीखा, चटपटा और खट्टा-मीठा स्वाद हर किसी को अपना दीवाना बना देता है।

मटन पाया और कीमा — खाने वालों की पहली पसंद

अमरोहा का मटन पाया और कीमा खाने वालों की पहली पसंद है। पाया को रातभर धीमी आंच पर अदरक-लहसुन, गरम मसाले और देसी घी में पकाया जाता है, जिससे सुबह तक शोरबा गाढ़ा और लजीज हो जाता है। पाया इतना गल जाता है कि हड्डी का सारा रस ग्रेवी में उतर आता है। इसे कुलचा या तंदूरी रोटी के साथ खाया जाता है।

यहां का कीमा भी खास है। बकरे के कीमे को भुने प्याज, टमाटर, दही और खास मसालों में भूनकर तैयार किया जाता है। इसमें तेल कम और खुशबू ज्यादा होती है। मंडी चौक और कोट की पुरानी दुकानों पर सुबह से ही पाया और कीमे की महक गली में फैल जाती है। एक बार खा लेंगे तो इसका स्वाद भूल नहीं पाएंगे।

अमरोहा के आम — विदेशों तक पहुंचती खुशबू

अमरोहा के दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम पूरे देश में मशहूर हैं। यहां के आमों का स्वाद, खुशबू और मिठास बेमिसाल है। ये आम दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक पहुंचते हैं, साथ ही दुबई, सऊदी अरब और यूरोप के कई देशों में भी इनका निर्यात होता है। हर साल हजारों टन आम विदेश भेजे जाते हैं।

यहां आम का सीजन मई के आखिरी हफ्ते से शुरू होकर अगस्त तक चलता है। सबसे पहले दशहरी, फिर लंगड़ा और आखिर में चौसा बाजार में आता है। अमरोहा को आमों की नगरी भी कहा जाता है। यहां की मिट्टी और मौसम आम को खास मिठास देते हैं। एक बार चखेंगे तो यह स्वाद कभी नहीं भूलेंगे।

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