संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर उमड़ते हैं भक्त, अंबाला के 150 साल पुराने शिव मंदिर का है अनोखा चमत्कार

अंबाला शहर में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर अपनी चमत्कारी मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है, जहां लोग संतान सुख की प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं। करीब 150 से 200 साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी कहानी और इसका इतिहास लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।

अंबाला का प्राचीन शिव मंदिर और अटूट आस्था

भारत में आस्था और विश्वास के कई ऐसे केंद्र हैं जो न केवल अपनी प्राचीनता के लिए जाने जाते हैं बल्कि वहां से जुड़ी अलौकिक घटनाओं के कारण भी चर्चा में रहते हैं। हरियाणा के अंबाला शहर में स्थित श्री शिव मंदिर पीपल वाला कुछ ऐसा ही एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। लगभग 150 से 200 साल पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने वाले दंपतियों के लिए एक विशेष स्थान है। आज भी लोग अपनी हताशा और उम्मीदों को लेकर भगवान भोलेनाथ की शरण में यहां आते हैं और जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।

मंदिर की स्थापना के पीछे का रहस्यमयी इतिहास

इस मंदिर की स्थापना के पीछे की कहानी बेहद पुरानी और दिलचस्प है। स्थानीय मान्यताओं और जानकारों के अनुसार, आज से लगभग डेढ़ से दो सदी पहले, ओम प्रकाश चोपड़ा के पूर्वज संतान न होने के कारण काफी व्यथित और परेशान थे। विवाह के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी जब उन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई, तो वे घोर चिंता में थे। इसी समय, एक साधु-संत का उस परिवार से मिलना हुआ। उस संत ने परिवार को भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने और एक शिव मंदिर का निर्माण करवाने का परामर्श दिया।

संत की सलाह को शिरोधार्य करते हुए, चोपड़ा परिवार ने एक विशाल पीपल के पेड़ के नीचे शिवलिंग की स्थापना की। उस समय के निर्माण की तकनीक के अनुसार, इस मंदिर को छोटी ईंटों, मिट्टी और चूने का उपयोग करके बनाया गया था। कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण के तुरंत बाद उस परिवार में खुशियों का आगमन हुआ और उनके घर में दो पुत्रों का जन्म हुआ। इस चमत्कारिक घटना के बाद, मंदिर के प्रति स्थानीय लोगों का विश्वास अटूट हो गया और यह स्थान आस्था का केंद्र बन गया।

श्री शिव मंदिर वकीलां वाला नाम के पीछे की सच्चाई

मंदिर के सेवादार सुरेंद्र मल्होत्रा का कहना है कि यह स्थान श्री शिव मंदिर पीपल वाला के अलावा श्री शिव मंदिर वकीलां वाला के नाम से भी विख्यात है। इसके पीछे का कारण यह है कि जिस परिवार ने इस मंदिर की नींव रखी थी, वे पेशे से वकील थे। इसी कारण स्थानीय लोग इसे वकील परिवार के मंदिर के रूप में भी जानते हैं। मंदिर के स्वरूप के बारे में बताते हुए सेवादार ने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूर आए हैं। आज मंदिर की पुरानी दीवारों को आधुनिक लुक देने के लिए उन पर टाइल्स लगाई गई हैं, लेकिन मंदिर का मूल ढांचा और वह ऐतिहासिक पीपल का पेड़ आज भी अपनी प्राचीन गरिमा को संजोए हुए है।

भक्तों की श्रद्धा और सावन का विशेष उत्सव

मंदिर की ख्याति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक भक्त ने मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर के शिवालय के चारों ओर करीब पांच किलो चांदी लगवाई थी। सावन के पवित्र महीने में इस मंदिर का वातावरण पूरी तरह से बदल जाता है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में हरिद्वार से गंगाजल लेकर अंबाला पहुंचते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। आने वाली 11 अगस्त को भी मंदिर में 251 लीटर गंगाजल के साथ भव्य जलाभिषेक करने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में मंदिर का संचालन श्री शिव मंदिर पीपल वाला सेवा मंडल (रजि.) की देखरेख में किया जा रहा है।

नाग देवता का चमत्कार और मंदिर की वर्तमान स्थिति

मंदिर से जुड़ी एक और अनोखी घटना नाग देवता से संबंधित है। लगभग 11 साल पहले महाशिवरात्रि के पावन पर्व के दौरान, एक काला सांप मंदिर के शिवलिंग के समीप आकर बैठ गया था। इस दृश्य को देख भक्त दंग रह गए और इसे भगवान शिव का ही अंश मानकर पूजा की जाने लगी। इस घटना के बाद से मंदिर में नाग देवता की छवियों को भी स्थापित किया गया है। आज अंबाला के हृदय स्थल पर स्थित यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक भव्यता, पीपल के वृक्ष की छाया और लोगों की गहरी आस्था के कारण हर आने वाले को शांति और विश्वास प्रदान करता है। सावन और शिवरात्रि के समय यहां हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठता है, जहां भक्त आज भी अपनी हर तरह की मन्नत पूरी होने की उम्मीद लिए आते हैं।

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