इंदौर नगर निगम के सम्मेलन के दौरान 'वंदे मातरम्' गाने से इनकार करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम को अदालत से बड़ा झटका लगा है। यहां की एक अदालत ने इस मामले में दायर उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए पार्षद के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत मामला बनता है।
अदालत ने सुनवाई के बाद ठुकराई याचिका
जज रूपेश नाईक ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के उपरांत फौजिया शेख अलीम की याचिका को नामंजूर कर दिया। अपनी याचिका में फौजिया ने दावा किया था कि उन्होंने कभी भी 'वंदे मातरम्' गाने से इनकार नहीं किया और राजनीतिक रंजिश के चलते उन्हें एक झूठे मामले में फंसाया गया है।
जांच में सहयोग का दावा, अभियोजन की आपत्ति
फौजिया शेख का कहना था कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि यदि उन्हें अग्रिम जमानत दी गई तो वह अपने पद का दुरुपयोग कर सकती हैं, गवाहों को धमका सकती हैं और फरार भी हो सकती हैं।
अदालत ने शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान, वीडियो फुटेज तथा जब्त की गई डिजिटल सामग्री का अवलोकन करने के बाद कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत अपराध बनता है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है और यह गैर जमानती है। जज ने विभिन्न अदालतों के अलग-अलग फैसलों का संदर्भ देते हुए याचिका को निरस्त कर दिया।
पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश मानने को कहा
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह 'अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य' मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करे। इन निर्देशों के अनुसार, सात साल तक की सजा वाले अपराधों में पुलिस को केवल मामला दर्ज होने भर से गिरफ्तारी नहीं करनी चाहिए, बल्कि गिरफ्तारी के ठोस आधार दर्ज करने चाहिए और वैकल्पिक कानूनी उपायों पर भी विचार करना चाहिए।
बजट सत्र में हुआ था पूरा विवाद
यह विवाद इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में 8 अप्रैल को उस समय शुरू हुआ था, जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए 'वंदे मातरम्' गाने से इनकार कर दिया था। निर्दलीय चुनाव जीतकर बाद में कांग्रेस में शामिल हुईं पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी फौजिया का साथ देते हुए राष्ट्रीय गीत गाने से मना कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने दोनों पार्षदों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत 15 अप्रैल को मामला दर्ज किया था।
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