मध्य प्रदेश के कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव की वापसी, सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया कैलेंडर

मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में करीब नौ साल से बंद छात्रसंघ चुनाव की बहाली होने जा रही है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को जानकारी दी है कि सितंबर महीने में सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में मतदान कराए जाएंगे।

नौ साल बाद चुनाव की राह हुई आसान

मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी जानकारी सामने आई है। राज्य के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में बीते करीब नौ सालों से जो छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया रुकी हुई थी, उसे अब सरकार ने दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट में आधिकारिक शैक्षणिक कैलेंडर दाखिल कर दिया है, जिसके अनुसार आगामी सितंबर माह में सभी सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए जाने हैं।

हाई कोर्ट में क्या हुआ

जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला छात्र नेता अदनान अंसारी द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा था। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि वर्ष 2017 के बाद से कॉलेजों में कोई चुनाव नहीं हुए हैं, लेकिन छात्रों से हर वर्ष चुनाव के नाम पर शुल्क की वसूली निरंतर की जा रही है, जो कि विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अपना शेड्यूल कोर्ट के सामने रखे जाने के बाद अदालत ने अब इस याचिका का निपटारा कर दिया है।

लिंगदोह समिति की सिफारिशें और कैलेंडर

याचिकाकर्ता ने अदालत में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया था कि राज्य सरकार लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन करने में विफल रही है। इसी के चलते इस साल जनवरी महीने में हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सरकार को वर्ष 2026-27 के सत्र के लिए एक स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करने का निर्देश दिया था। सोमवार को राज्य सरकार ने जो आधिकारिक कैलेंडर अदालत को सौंपा है, उसमें सितंबर में चुनाव कराए जाने का पूरा प्रावधान शामिल है।

प्रशासन को सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत से यह मांग की गई थी कि कैंपस के भीतर शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। इस पर कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। संस्थान के प्रमुखों को यह भी छूट दी गई है कि यदि जरूरत पड़े, तो वे शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की मदद ले सकते हैं ताकि चुनाव का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

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