उत्तराखंड में मौसम का अलर्ट: बागेश्वर और देहरादून समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिसके चलते मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए चेतावनी जारी की है। देहरादून और बागेश्वर जैसे जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

मानसून का फिर से रौद्र रूप

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून की सक्रियता एक बार फिर से जनजीवन को प्रभावित करने के लिए तैयार है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से जारी ताजा अपडेट के अनुसार, राज्य में अगले चार दिनों तक हल्की से लेकर मध्यम बारिश का दौर जारी रहने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर के मुताबिक, विशेष रूप से 7, 8 और 9 अगस्त की तारीखें चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, क्योंकि इन दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है।

ऑरेंज अलर्ट और प्रशासन की तैयारी

मौसम विभाग ने आने वाले 24 घंटों को देखते हुए देहरादून और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। राज्य प्रशासन लगातार हो रही बारिश और उसके कारण होने वाले भूस्खलन और यातायात में आ रही बाधाओं को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह से अलर्ट मोड में काम कर रहा है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे नदी और नालों के करीब जाने से बचें, पहाड़ों पर अनावश्यक यात्रा न करें और मौसम विभाग द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का पूरी तरह से पालन करें।

17 अति संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन पर कड़ी नजर

देहरादून जिले में लगातार हो रही बरसात के कारण भूस्खलन की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। जिला प्रशासन ने जौनसार-बावर क्षेत्र की लाइफलाइन कहे जाने वाले कालसी–चकराता मोटर मार्ग समेत अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी आशीष चौहान ने जानकारी दी है कि जिले में कुल 17 अति संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन की पहचान की गई है, जहाँ चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। आपदा से निपटने की तैयारियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे जनपद में सड़कों को तुरंत खोलने के लिए 66 जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं। राहत की बात यह है कि सोमवार की सुबह मलबा आने के कारण जो पांच प्रमुख सड़कें बंद हो गई थीं, उनमें से ज्यादातर को अब यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। इसमें कालसी–चकराता मार्ग का वह हिस्सा भी शामिल है जिसे जजरेड डेंजर जोन माना जाता है।

कर्णप्रयाग में भूस्खलन से कटा संपर्क

चमोली जिले से आई तस्वीरें और वीडियो इस आपदा की भयावहता को दर्शाते हैं। रविवार को कर्णप्रयाग–नैनीसैंन मोटर मार्ग पर एक बहुत बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसके कारण पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे सड़क पर आ गिरा। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि मलबा किस गति से नीचे आया। गनीमत रही कि जब यह घटना हुई, उस समय सड़क पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। इस भूस्खलन के कारण सड़क पूरी तरह बंद हो गई है और कपीरी पट्टी के दर्जनों गांवों का मुख्य बाजार कर्णप्रयाग से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। लोक निर्माण विभाग की टीमें जेसीबी के साथ मलबे को हटाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन लगातार हो रहे छोटे-छोटे भूस्खलन के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

गंगोत्री हाईवे पर संकट के बादल

उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। भटवाड़ी ब्लॉक के चढ़ेथी क्षेत्र से आगे पापड़ गाड़ के पास सड़क का लगभग 70 मीटर हिस्सा फिर से धंसने लगा है। इस जगह पर दरारें लगातार चौड़ी होती जा रही हैं, जिससे हाईवे के कभी भी पूरी तरह बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। वर्तमान में यहाँ से केवल छोटे वाहनों को निकलने की अनुमति दी जा रही है, जबकि भारी वाहनों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 की आपदा के दौरान भी इसी स्थान पर सड़क पूरी तरह बह गई थी, जिसके बाद सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इसका पुनर्निर्माण किया था। अब एक बार फिर सड़क के धंसने से प्रशासन और स्थानीय निवासियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

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