सावन का पहला सोमवार और आज का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सावन का महीना अत्यंत पवित्र माना गया है और इस पूरे माह में भगवान शिव की आराधना का विशेष विधान है। आज 3 अगस्त 2026 को सावन का पहला सोमवार है। इस दिन महादेव के भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ मंदिरों में पहुंच रहे हैं। सावन के पहले सोमवार पर इस बार विशेष शुभ योगों का मिलन हो रहा है, जो इसे और भी अधिक फलदायी बना रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से न केवल भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि जीवन के सभी कष्टों और ग्रहों के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति मिलती है।
शुभ योगों का अद्भुत संयोग
आज के दिन बन रहे ग्रह-नक्षत्रों के योग इसे आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत शक्तिशाली बना रहे हैं:
- हंस महापुरुष योग: ज्योतिष शास्त्र के पंच महापुरुष योगों में से एक, हंस योग का निर्माण तब होता है जब गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हों। इससे व्यक्ति को ज्ञान, पद, प्रतिष्ठा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- सुकर्मा योग: यह योग सुबह से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक बना रहेगा। इसके स्वामी देव इंद्र हैं और मंगल ग्रह का भी इस पर प्रभाव रहता है, जिससे यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
- धृति योग: रात 9 बजकर 13 मिनट से पूरी रात तक धृति योग रहेगा। यह नया व्यापार शुरू करने, भूमि पूजन करने और गृह निर्माण जैसे कार्यों के लिए बहुत ही शुभ फलदायी है।
पूजा विधि और व्रत का संकल्प
सावन के सोमवार का व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। व्रत करने वाले भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें। तत्पश्चात पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर) से शिवजी को स्नान कराएं। पूजन में बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफेद चंदन और मौसमी फलों को अर्पित करना चाहिए। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। शिवलिंग की पूजा सुबह के अलावा प्रदोष काल में करना सबसे उत्तम माना गया है।
सावन सोमवार 2026 के मुख्य मुहूर्त
आज के दिन जलाभिषेक के लिए शुभ समय इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 से 05:01 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:42 से 03:36 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 06:26 से 07:56 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:11 से 07:32 बजे तक
पूजन के लिए शुभ समय की सूची:
- अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 05:44 से 07:24 बजे तक
- शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 09:05 से 10:46 बजे तक
- चर-सामान्य मुहूर्त: दोपहर 02:08 से 03:49 बजे तक
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 03:49 से 05:30 बजे तक
- अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: शाम 05:30 से 07:11 बजे तक
सावन के सभी सोमवार की तिथियां
सावन 2026 के दौरान सोमवार के व्रत की तिथियां निम्न हैं:
- पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
- दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
- तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
- चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
श्रद्धालुओं की अपार आस्था
सावन के इस पहले सोमवार के मौके पर देशभर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिरों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से वातावरण गुंजायमान है। श्रद्धालु अपने परिवार की उन्नति, बेहतर स्वास्थ्य और करियर में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना कर रहे हैं। सच्ची आस्था के साथ की गई शिव आराधना निश्चित रूप से भक्तों पर कृपा बरसाती है।
भगवान शिव के प्रमुख मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है:
- मूल पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय।
- महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात॥
- अन्य मंत्र: ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः।
शिवजी की आरती
पूजा के समापन पर शिवजी की आरती करना अनिवार्य है: ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी। जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला। शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
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