पाकिस्तान: स्वात में शांति रैली के दौरान भीषण धमाका, 7 लोगों की गई जान और 18 घायल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आयोजित एक शांति रैली में हुए धमाके से हड़कंप मच गया है, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई और 18 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

पाकिस्तान में शांति रैली पर बड़ा हमला

पाकिस्तान से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। रविवार के दिन उत्तर पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक शांति रैली के दौरान हुए जोरदार विस्फोट में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना में करीब 18 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पतालों में भेजा गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह घटना स्वात जिले के कबाल कस्बे में उस समय हुई जब शांति की मांग को लेकर लोग एकजुट हुए थे। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद 7 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है।

स्वात अमन जिरगा की रैली और फिदायीन हमले की आशंका

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, स्वात में इस शांति रैली का आयोजन स्थानीय जनजातीय परिषद यानी स्वात अमन जिरगा की ओर से किया गया था। इस रैली का मुख्य उद्देश्य इलाके में अमन और शांति को बहाल करने की मांग उठाना था। हालांकि, अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि यह धमाका एक फिदायीन हमले की तरह प्रतीत हो रहा है। प्रशासन की ओर से अभी इसकी अंतिम और औपचारिक पुष्टि किया जाना बाकी है।

सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बना स्वात

पिछले कुछ महीनों से स्वात में सुरक्षा व्यवस्था काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। धमाके की सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पतालों में पहुंचाया। वहीं, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और जांच के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।

हाल के दिनों में खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती हिंसा

यह इलाका पिछले कुछ समय से लगातार हिंसा की चपेट में है। महज एक हफ्ते पहले, यानी 26 जुलाई को भी खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में एक घातक धमाका हुआ था। उस घटना में 2 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, सलारजई तहसील में ताली बांध के पास हुए उस विस्फोट में मारे गए लोगों की पहचान गुलाम और सुलेमान कारी के रूप में की गई थी।

अशांति का केंद्र क्यों बन रहा है खैबर पख्तूनख्वा?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का उत्तर पश्चिम हिस्सा, विशेषकर खैबर पख्तूनख्वा, पिछले कई वर्षों से गंभीर अशांति और उग्रवाद से जूझ रहा है। इसके मुख्य कारणों में अफगानिस्तान के लड़ाकों की सरहद पार आवाजाही और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ उनका निरंतर संघर्ष शामिल है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में रहने वाली स्थानीय आबादी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बनी डूरंड लाइन नामक सीमा रेखा को स्वीकार नहीं करती है, जिसके कारण यहां स्थिति अक्सर तनावपूर्ण बनी रहती है। फिलहाल, इस ताजा घटना के बाद इलाके में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।

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