पटना में अब घुटने और कूल्हे का 3D प्रिंटेड इंप्लांट संभव, सर्जरी के कुछ घंटों बाद ही चलने लगेंगे मरीज

पटना के डॉक्टर आशीष सिंह ने आधुनिक 3D प्रिंटिंग और रोबोटिक तकनीक के जरिए हड्डियों के इलाज में नई क्रांति ला दी है, जहां मरीज सर्जरी के कुछ ही घंटों बाद चलने फिरने में सक्षम हो रहे हैं।

अत्याधुनिक तकनीक से इलाज

पटना में हड्डियों के इलाज के क्षेत्र में एक नई तकनीक ने दस्तक दी है। अब अस्पताल के भीतर ही 3D तकनीक का उपयोग करके हड्डियों का सटीक स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। डॉक्टर आशीष सिंह के अनुसार, यह तकनीक मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि इसे मरीज के शरीर में आसानी से इंप्लांट किया जा सकता है।

सर्जरी के बाद तेजी से सुधार

डॉक्टर आशीष सिंह बताते हैं कि अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर दर्द प्रबंधन और फास्ट ट्रैक रिकवरी प्रोटोकॉल के तालमेल से मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार की गति काफी बढ़ गई है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई मरीज ऑपरेशन के 6 से 8 घंटे के भीतर ही व्हीलचेयर का सहारा छोड़कर फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में चलने लगते हैं।

सीढ़ियां चढ़ने में भी आसानी

इस तकनीक की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र दो दिन के अंदर ही अधिकांश मरीज सीढ़ियां चढ़ने का अभ्यास शुरू कर देते हैं। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में यह रिकवरी प्रक्रिया काफी तेज और सुविधाजनक है।

आयुष्मान भारत योजना का लाभ

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उन्नत उपचार के लिए मरीजों को अत्यधिक आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। अस्पताल में 3D प्रिंटिंग और रोबोटिक तकनीक के जरिए किए जाने वाले कूल्हे और घुटने के प्रत्यारोपण की सुविधा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे जरूरतमंद मरीजों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज सुलभ हो गया है।

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