बीजेपी में नहीं है सुकून
तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज सांसद सौगत रॉय ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि जो बागी नेता पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जुड़े हैं, वे अब वहां काफी असहज स्थिति में हैं। सौगत रॉय ने बताया कि उनकी खुद उन नेताओं में से कुछ से बातचीत हुई है और यदि वे अपनी पुरानी पार्टी में वापस आने का फैसला करते हैं, तो यह एक सुखद स्थिति होगी। सौगत रॉय ने कहा, मैंने उनमें से कुछ नेताओं से सीधा संपर्क साधा है। वे बीजेपी के साथ खुद को सहज नहीं पा रहे हैं। ऐसी प्रबल संभावना है कि वे वहां किसी विशेष प्रकार के भय या भारी दबाव के कारण बने हुए हैं। अगर वे वापस घर लौटते हैं, तो यह पार्टी के लिए अच्छा कदम साबित होगा। मैंने इस विषय पर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी चर्चा की है। हालांकि, रॉय ने अभी उन विशिष्ट नेताओं के नामों का खुलासा नहीं किया है जिनसे उनकी व्यक्तिगत बातचीत हुई है।
एनसीपीआई के सांसदों की अनुपस्थिति से मची खलबली
सौगत रॉय का यह बयान उस समय सामने आया है जब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई के तीन सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान मंगलवार को एनडीए द्वारा आयोजित मंगल मिलन बैठक से नदारद रहे। यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि एनसीपीआई को केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बनने के बाद पहली बार आधिकारिक तौर पर इस बैठक में शामिल होना था। इन तीन सांसदों के बैठक में नहीं पहुँचने के बाद राजनीतिक गलियारों में मतभेदों की अटकलें जोर पकड़ने लगी हैं। भले ही एनसीपीआई की ओर से पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के आंतरिक विवाद को पूरी तरह से नकार दिया गया हो, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का स्पष्ट मानना है कि ये तीनों सांसद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन करने के पक्ष में नहीं हैं।
सौगत रॉय ने पहले भी दिया था संकेत
सौगत रॉय ने शुक्रवार को भी इसी तरह की बात दोहराते हुए दावा किया था कि उन्हें अंदरूनी जानकारी मिली है कि अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान एनडीए के साथ जुड़ने के इच्छुक नहीं हैं। सौगत रॉय ने कहा, मुझे यह जानकारी दी गई है कि वे एनडीए का हिस्सा नहीं बनना चाहते और बीजेपी के साथ अपना तालमेल बिठाने में असमर्थ हैं। यही मुख्य कारण रहा कि उन्होंने बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। फिलहाल बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक किसी भी परिणाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। जब इन नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ा था, तब ऐसी कोई निश्चितता नहीं थी कि वे अंततः बीजेपी के खेमे में ही जाएंगे। अब स्थिति यह है कि उनके लिए अपने समुदाय के सामने अपनी छवि को लेकर जवाब देना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
एनसीपीआई विवाद और पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर से उठे विरोध के चलते 20 बागी सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया था। बाद में इन नेताओं ने एनसीपीआई नामक एक नई और अनजानी सी पार्टी का हाथ थाम लिया। उस वक्त उन्होंने ऐलान किया था कि उनकी पार्टी केंद्र में बीजेपी के एनडीए गठबंधन का पूरा समर्थन करेगी। अब एनसीपीआई के तीन मुख्य सांसदों के एनडीए की बैठक से किनारा करने और सौगत रॉय के दावों के बाद इन नेताओं की घर वापसी की चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक इन नेताओं की वापसी को लेकर न तो कोई आधिकारिक फैसला हुआ है और न ही किसी भी पक्ष ने इसे लेकर कोई औपचारिक पुष्टि की है।
https://www.indiatv.in/west-bengal/saugata-roy-claims-rebel-leaders-unhappy-in-nda-ncpi-mp-absence-fuels-tmc-return-buzz-2026-08-01-1234719