बिहार में नई स्थानांतरण प्रणाली का आगाज
बिहार राज्य के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्थानांतरण और समानुपातीकरण की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। राज्य सरकार ने नई शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 के तहत यह कदम उठाया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के लगभग 77 हजार सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को अधिक संतुलित और सुव्यवस्थित बनाना है। शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को लेकर सभी जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और स्पष्ट किया है कि यह पूरा स्थानांतरण अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक आधार पर संचालित होगा। किसी भी शिक्षक को उनकी इच्छा के विरुद्ध स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।
शिक्षक आवेदनों की वर्तमान स्थिति
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों से भारी संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, अभी तक कुल 22,591 सरप्लस शिक्षकों ने समानुपातीकरण और समायोजन के लिए अपने आवेदन जमा किए हैं। इसके अलावा, म्युचुअल ट्रांसफर के लिए कुल 2,142 शिक्षकों ने विभाग के पास आवेदन किया है। पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है ताकि इसमें किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप न हो सके और पारदर्शिता बनी रहे।
30 स्कूलों का विकल्प और चयन की सुविधा
नई नियमावली के अंतर्गत स्थानांतरण की प्रक्रिया को शिक्षकों के लिए काफी लचीला बनाया गया है। प्रत्येक शिक्षक को अपनी पसंद के अनुसार 30 स्कूलों का चयन करने का विकल्प दिया जाएगा। महिला शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें उनके गृह पंचायत के आसपास की पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ति मिले। पुरुष शिक्षकों के लिए व्यवस्था कुछ अलग है, जहाँ उन्हें अपने संबंधित ब्लॉक के अलावा आसपास के चार ब्लॉकों में से चुनाव करने की अनुमति प्रदान की गई है।
स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकता और पांच साल का नियम
शिक्षा विभाग ने संवेदनशील मामलों को देखते हुए गंभीर बीमारियों या क्रॉनिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे शिक्षकों को ट्रांसफर प्रक्रिया में विशेष प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही एक व्यवस्थित नीति के तहत प्रत्येक शिक्षक को हर पांच वर्ष की सेवा अवधि के बाद स्थानांतरण का लाभ प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है, ताकि शिक्षकों को एक ही स्थान पर लंबे समय तक रहने की बाध्यता महसूस न हो और व्यवस्था में बदलाव बना रहे।
निगरानी और तकनीकी सहायता प्रणाली
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे कार्य की गुणवत्ता और गति पर उनकी व्यक्तिगत नजर रहेगी। अगले तीन महीनों तक, वे स्वयं हर दो दिन पर स्थानांतरण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करेंगे। जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी, डीडीसी और डीईओ को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी शिक्षक को यदि स्थानांतरण से संबंधित कोई आपत्ति होती है, तो वे जिला स्तर पर अपनी अपील दर्ज करा सकेंगे। तकनीकी सहायता के लिए विभाग ने ई-शिक्षा पोर्टल पर विशेष हेल्पलाइन नंबर 9523300520 और 9430820499 जारी किए हैं, जबकि किसी भी शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 14417 पर संपर्क किया जा सकता है। मंत्री ने शिक्षकों से सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और भ्रामक वीडियो से बचने की अपील की है।
TRE-4 भर्ती और भविष्य की योजनाएं
स्थानांतरण के अलावा, शिक्षा विभाग ने शिक्षक भर्ती को लेकर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि TRE-4 भर्ती की अधियाचना 31 जुलाई से पूर्व ही भेजी जा चुकी है। अब विभाग ने यह तय किया है कि हर वर्ष जुलाई के महीने में ही भर्ती का प्रस्ताव नियमित रूप से भेजा जाएगा, जिससे नियुक्तियां समय पर पूरी हो सकें।
पटना जिले के लिए अलग से बनेगी नीति
राजधानी पटना को लेकर विभाग ने एक विशेष रणनीति बनाने के संकेत दिए हैं। चूंकि पटना जिले में सरप्लस शिक्षकों की संख्या राज्य के अन्य जिलों की तुलना में काफी अधिक है, इसलिए यहाँ सामान्य ट्रांसफर प्रक्रिया से इतर एक अलग नीति लागू की जाएगी। इस नई नीति का उद्देश्य पटना में अतिरिक्त शिक्षकों की संख्या को कम करना और व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करना है। विभाग का मानना है कि राजधानी के विशिष्ट भौगोलिक और प्रशासनिक स्वरूप को देखते हुए यहां विशेष व्यवस्था अनिवार्य है।
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