भीलवाड़ा में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला जारी, 2 महीने में 7 महिलाओं ने तोड़ा दम

राजस्थान के भीलवाड़ा में एक बार फिर दो प्रसूताओं की अस्पताल में मौत से हड़कंप मच गया है, जिसके बाद चिकित्सा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पिछले दो महीनों में इलाके में सात महिलाओं की मौत के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

भीलवाड़ा में चिकित्सा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। बुधवार के दिन जिले के सरकारी अस्पताल में दो प्रसूताओं की दुखद मौत हो गई। इस घटना ने पूरे चिकित्सा विभाग को सकते में डाल दिया है। इन मौतों के बाद भीलवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. संजीव शर्मा ने पूरे मामले की गहन जांच करने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। मृतकाओं में एक शाहपुरा क्षेत्र की रहने वाली थी, जबकि दूसरी भीलवाड़ा शहर के पटेल नगर की निवासी थी। महात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि इन महिलाओं की जान अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग), एम्बोलिज्म और दौरे पड़ने जैसी गंभीर जटिलताओं के कारण गई है।

दो महीनों में सात महिलाओं की मौत

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में यह कोई पहली घटना नहीं है। जून महीने के शुरुआती पखवाड़े में इसी अस्पताल में चार प्रसूताओं समेत कुल पांच महिलाओं की मौत हो गई थी, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी। उस समय मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने स्वयं जिला अस्पताल का दौरा किया था और व्यवस्थाओं में सुधार के कड़े निर्देश दिए थे। जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू की निगरानी में पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने क्रिटिकल प्रसूताओं के उपचार के लिए विशेष वार्ड तक तैयार करवाया था। लेकिन, हालिया दो मौतों ने जिला प्रशासन के उन सभी दावों और सुधारों की तैयारियों पर फिर से बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

दूसरी बार मां बनने वाली सुगना का दुखद अंत

बुधवार की शाम महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ शिशु इकाई में हुई मौतों ने परिवार और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। कोटड़ी क्षेत्र के दातडा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय सुगना की मौत से उसके पूरे गांव में मातम का माहौल है। सुगना दूसरी बार मां बनने वाली थी, लेकिन दुर्भाग्यवश वह अपने नवजात बच्चे को ठीक से देख भी नहीं सकी। उनका प्रसव शाहपुरा के सैटेलाइट अस्पताल में सामान्य तरीके से संपन्न हुआ था, लेकिन प्रसव के तुरंत बाद ही उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव की गंभीर समस्या हो गई।

उपचार के दौरान दम तोड़ा

शाहपुरा के डॉक्टरों ने सुगना की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल रेफर कर दिया। जब वह अस्पताल पहुंची, तब तक उनकी स्थिति काफी नाजुक हो चुकी थी। उनकी पल्स और ब्लड प्रेशर का स्तर बेहद नीचे गिर गया था। अस्पताल में की गई जांच में यह सामने आया कि उनका हीमोग्लोबिन (एचबी) केवल 1.8 ग्राम रह गया था और प्लेटलेट्स की संख्या गिरकर मात्र 4000 तक पहुंच गई थी। अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और खून एवं प्लेटलेट्स चढ़ाकर बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने के कारण 22 वर्षीय सुगना बैरवा की जान नहीं बचाई जा सकी।

पहली बार मां बनी रानी ने भी गंवाई जान

इस हादसे में जान गंवाने वाली दूसरी महिला 18 वर्षीय रानी बंजारा थी। पटेल नगर की निवासी रानी पहली बार मां बनी थी। अपने पहले बच्चे को जन्म देने के बाद परिवार में जो खुशियां आई थीं, वे चंद घंटों में ही मातम में बदल गईं। रानी को प्रसव के बाद पीपीएच की समस्या हुई और एम्बोलिज्म के साथ दौरे पड़ने लगे। महात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने स्पष्ट किया कि रानी की डिलीवरी सामान्य थी, लेकिन प्रसव के दौरान हुई गंभीर जटिलताओं ने उनकी जान ले ली।

चिकित्सा विभाग की जांच शुरू

सीएमएचओ डॉ. संजीव शर्मा ने इन मौतों को अत्यंत दुखद करार दिया है। उन्होंने बताया कि विभाग अब पूरे तथ्यों की परत-दर-परत जांच कर रहा है। उन्होंने अस्पताल के पिछले डेटा को भी खंगालने के निर्देश दिए हैं ताकि इन बार-बार हो रही घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल, भीलवाड़ा प्रशासन इस बात का जवाब देने की स्थिति में नहीं है कि तमाम दावों और विशेष वार्ड के निर्माण के बावजूद आखिर इतनी मौतों का सिलसिला क्यों नहीं रुक पा रहा है।

https://www.indiatv.in/rajasthan/two-women-died-after-delivery-in-bhilwara-seven-deaths-in-two-months-medical-department-launched-investigation-2026-07-31-1234547