छत्तीसगढ़ में नकली पनीर पर बड़ा एक्शन: अब होटल और रेस्टोरेंट में नहीं चलेगा एनालॉग पनीर का खेल, लगेगा 5 लाख का जुर्माना

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में नकली यानी एनालॉग पनीर की बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के निर्देश दिए हैं।

बाजारों में मिल रहे नकली पनीर पर सरकार सख्त

क्या आप जानते हैं कि जिस पनीर का स्वाद आप रेस्टोरेंट में ले रहे हैं, वह असली दूध का बना है या नहीं? छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य भर में असली पनीर के नाम पर बेचे जा रहे एनालॉग पनीर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने साफ शब्दों में निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी होटल, मिठाई की दुकान या रेस्टोरेंट में एनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। सरकार का स्पष्ट मानना है कि ग्राहकों को परोसा जाने वाला भोजन न केवल स्वादिष्ट बल्कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भी होना चाहिए। इसी दिशा में कदम उठाते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को सख्त निगरानी रखने और नियमों को तोड़ने वालों पर कड़ा एक्शन लेने के आदेश दिए गए हैं।

क्या है एनालॉग पनीर और क्यों है यह खतरनाक?

सामान्य तौर पर पनीर असली दूध से बनता है, लेकिन एनालॉग पनीर पूरी तरह से एक अलग प्रक्रिया का नतीजा है। यह उत्पाद असली दूध से नहीं बनता, बल्कि इसे वनस्पति तेल, स्टार्च, मिल्क पाउडर और व्हे प्रोटीन जैसे रसायनों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसकी निर्माण लागत असली पनीर की तुलना में काफी कम होती है। यही वजह है कि अधिक मुनाफा कमाने के लालच में कई व्यापारी बिना ग्राहकों को जानकारी दिए इसे असली डेयरी पनीर बताकर बेचते हैं। यदि नियमों के तहत इसे अलग लेबल लगाकर बेचा जाए तो यह एक अलग श्रेणी है, लेकिन इसे दूध का पनीर बताकर ग्राहकों को परोसना सीधे तौर पर धोखाधड़ी और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।

जुर्माने का प्रावधान और विभाग की ढिलाई

राज्य में खाद्य पदार्थों की शुद्धता की जांच के लिए हर साल अभियान चलाए जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में औसतन 250 से अधिक पनीर के सैंपल जांच के लिए जुटाए जाते हैं, जिनमें से कई सैंपल अमानक यानी नॉन स्टैंडर्ड श्रेणी में पाए जाते हैं। विभाग की जांच प्रक्रिया एडीएम कोर्ट तक तो पहुंचती है, लेकिन अक्सर अमानकता साबित न हो पाने के कारण दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती। कानून के अनुसार, नकली या अमानक पनीर बेचने पर 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन अब तक कई मामलों में बहुत कम जुर्माना लगाया गया, जिससे कारोबारियों के हौसले बुलंद थे। अब सरकार ने पुरानी ढिलाई को खत्म करते हुए सख्त रुख अपना लिया है।

लेबलिंग के नियमों का अब कड़ाई से होगा पालन

अतीत में एनालॉग पनीर की बिक्री के लिए कुछ विशेष नियम तय थे, जैसे कि पैकेट के ऊपर स्पष्ट रूप से यह लिखना अनिवार्य था कि यह डेयरी पनीर नहीं बल्कि एनालॉग प्रोडक्ट है। इसके अलावा, खुले में इसकी बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित थी। प्रदेश में मौजूद कई फैक्ट्रियों में इन उत्पादों का निर्माण किया जाता है। सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी कीमत पर नकली पनीर को असली का चोला पहनाकर नहीं बेचा जाएगा। जो भी संस्थान या दुकान इस नियम का उल्लंघन करेगी, उसे भारी आर्थिक दंड के साथ कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। स्वास्थ्य मंत्री का यह कदम आम जनता की सेहत को सुरक्षित रखने और बाजारों में पारदर्शिता लाने की एक बड़ी पहल है।

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