नोट गिनने वाली मशीनें हो गईं फेल
पश्चिम बंगाल में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रशासन और आम जनता को हैरान कर दिया है। बीरभूम जिले में एक रिटायर्ड बस ड्राइवर के साधारण से दिखने वाले घर में छापेमारी के दौरान पुलिस को नोटों का ऐसा जखीरा मिला कि उसे गिनते-गिनते नोट गिनने वाली मशीनें तक जवाब दे गईं। छापेमारी के दौरान मौके पर पांच नोट गिनने वाली मशीनें खराब हो गईं और रात भर नोटों की गिनती का सिलसिला चलता रहा। अब तक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पुलिस ने 28 करोड़ 50 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। इसके अतिरिक्त, घर के एक कोने में रखे गंदे थैले से 15 किलो शुद्ध सोना भी जब्त किया गया है। यह पूरा मामला सरकारी खजाने की लूट और भ्रष्टाचार की एक बड़ी परत को खोलता नजर आ रहा है। एक मामूली वेतन पाने वाला सरकारी कर्मचारी आखिर कैसे करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया, यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
चोर से पुलिस को मिला बड़े खजाने का सुराग
इस पूरे मामले की शुरुआत एक सामान्य चोरी की जांच से हुई। बीरभूम पुलिस जब एक चोर से पूछताछ कर रही थी, तब उसे इस गुप्त खजाने के बारे में जानकारी मिली। पुलिस ने सूचना के आधार पर रिटायर्ड बस ड्राइवर मोहम्मद मिनार मंडल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जब पुलिस ने उनसे इतनी बड़ी रकम के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने जो खुलासा किया, उसने जांच अधिकारियों को चौंका दिया। मिनार मंडल ने बताया कि यह सारा पैसा और सोना उनका नहीं है, बल्कि यह तुलु मंडल का है। पुलिस ने जब तुलु मंडल के बारे में जानकारी जुटाई, तो पता चला कि उसका असली नाम मोहम्मद नजीबुद्दीन है। वह इलाके में पत्थर के बड़े व्यापारी के तौर पर जाना जाता है और स्टोन क्रशिंग का काम करता है। यही नहीं, वह टीएमसी नेता अणुव्रत मंडल का बेहद करीबी बताया जाता है।
पशु तस्करी मामले में अणुव्रत मंडल का नाम
इस पूरे प्रकरण में टीएमसी नेता अणुव्रत मंडल का नाम आने से राजनीति गरमा गई है। ज्ञात हो कि अणुव्रत मंडल पहले से ही पशु तस्करी के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं और वर्तमान में बेल पर बाहर हैं। पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि आखिर मिनार मंडल के घर में यह पैसा क्यों छुपाया गया था और इसके पीछे की असल साजिश क्या है। पुलिस उन सभी संपर्कों को खंगाल रही है जो तुलु मंडल, मिनार मंडल और अणुव्रत मंडल के बीच के रिश्तों को जोड़ते हैं।
नोटों से भरे 25 बैग और लोहे की अलमारी
पुलिस जब छापेमारी के लिए मोहम्मद मिनार मंडल के घर पहुंची, तो उन्हें बाहर से देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि यहां कुछ संदिग्ध हो सकता है। घर काफी पुराना था और दीवारों पर सीलन भी थी। लेकिन जैसे ही पुलिस ने अंदर के कमरों की तलाशी ली, उनके होश उड़ गए। वहां लोहे की चार बड़ी अलमारियां रखी थीं। जब पुलिस ने इन अलमारियों के ताले तोड़े, तो अंदर नोटों के बंडल के अलावा कुछ भी नहीं था। पुलिस ने वहां से 25 बैग बरामद किए, जो पूरी तरह से नोटों से भरे थे। गिनती के बाद पता चला कि इसमें पांच सौ के कुल 5 लाख 70 हजार नोट थे, जिनकी कुल कीमत 28 करोड़ 50 लाख रुपये आंकी गई है।
सोने की ईंटों का जखीरा
कैश मिलने के बाद जब पुलिस ने कमरे की तलाशी जारी रखी, तो उन्हें एक कोने में एक पुराना और गंदा थैला मिला। उस थैले को खोलते ही पुलिस अधिकारी हैरान रह गए क्योंकि उसमें सोने की ईंटें भरी हुई थीं। कुल 14 गोल्ड बार बरामद किए गए, जिनमें से प्रत्येक का वजन एक किलोग्राम है। इसके साथ ही 100 ग्राम के 10 सोने के बिस्किट भी मिले। इस तरह कुल 15 किलो 24 कैरेट सोना बरामद हुआ है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 21 करोड़ 50 लाख रुपये बताई जा रही है। अगर नकदी और सोने को मिला दिया जाए, तो इस घर से लगभग 50 करोड़ रुपये का अवैध खजाना जब्त किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पिछले सालों में पार्थ चटर्जी के सहयोगियों के यहां से की गई बरामदगी के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी मानी जा रही है।
बस ड्राइवर का कनेक्शन और तुलु मंडल की असलियत
मोहम्मद मिनार मंडल, जो लंबे समय तक सरकारी बस ड्राइवर रहे, अब रिटायर हो चुके हैं। सवाल यह है कि एक रिटायर कर्मचारी के पास इतना पैसा कहां से आया? पूछताछ में उन्होंने साफ कहा कि वह केवल तुलु मंडल (मोहम्मद नजीबुद्दीन) के बिजनेस का मैनेजर के तौर पर काम देखते थे। वे तुलु मंडल के साले हैं। तुलु मंडल बीरभूम के पत्थर माफिया के तौर पर जाना जाता है। पुलिस ने जब तुलु मंडल के घर दबिश दी, तब तक वह फरार हो चुका था। फिलहाल मिनार मंडल के घर को सील कर दिया गया है और सारा माल मोहम्मद बाजार थाने में सुरक्षित रखा गया है।
पड़ोसियों के लिए बड़ा झटका
मिनार मंडल जिस इलाके में रहते हैं, वहां मध्यमवर्गीय परिवारों का बसेरा है। स्थानीय लोगों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। पड़ोसियों का कहना है कि मिनार मंडल बहुत ही साधारण जीवन जीते थे, उन्हें देखकर कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उनके पास इतना अकूत धन है। उनके पहनावे और खान-पान में कभी भी ऐसी कोई विलासिता नहीं दिखी जो करोड़ों की संपत्ति की ओर इशारा करे।
ट्यूशन पढ़ाने वाले से अरबपति बनने की कहानी
तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन की जीवन यात्रा किसी फिल्म जैसी है। जांच में सामने आई कुछ अहम बातें इस प्रकार हैं:
- करीब 25 साल पहले तुलु मंडल घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे और उनकी मासिक कमाई महज 3 हजार रुपये थी।
- वर्ष 2014 तक वे आर्थिक रूप से बहुत संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उसी वर्ष वे टीएमसी नेता अणुव्रत मंडल के संपर्क में आए।
- अणुव्रत मंडल की छत्रछाया में उन्हें साल 2016 में बीरभूम में स्टोन माइनिंग का सरकारी टैक्स वसूलने का ठेका मिला।
- साल 2022 में उन्होंने अपनी बेटी की शादी में 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए, जिसके बाद से ही ईडी की नजर उन पर पड़ी थी।
सरकारी राजस्व में सेंध
पुलिस को संदेह है कि मिनार मंडल के घर से बरामद पैसा असल में सरकारी राजस्व का हिस्सा है। आरोप है कि तुलु मंडल ने स्टोन कारोबारियों से राजस्व के नाम पर अवैध वसूली की और उन्हें फर्जी रसीदें थमा दीं। इस शक को बल इस तथ्य से मिलता है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन से पहले बीरभूम में माइनिंग से प्रतिदिन केवल 19 लाख रुपये सरकारी खजाने में आते थे, लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 83 करोड़ रुपये प्रति दिन तक पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि तुलु मंडल का नेटवर्क सरकारी खजाने का 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खुद हड़प रहा था और मात्र 0.25 प्रतिशत ही सरकारी खाते में जमा कराता था।
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