बरेली में तीन दिन की मशक्कत के बाद मिला नाले में बहे दिव्यांग बच्चे का शव, इलाके में पसरा मातम

बरेली के आंवला इलाके में बारिश के दौरान नाले में गिरे 6 साल के दिव्यांग मासूम प्रीत का शव गुरुवार को मिल गया। तीन दिनों तक चले व्यापक खोजबीन अभियान के बाद बच्चे का शव बरामद किया गया है।

तीन दिन के सर्च ऑपरेशन के बाद मिला प्रीत

बरेली के आंवला इलाके में दिल दहला देने वाली घटना का दुखद अंत हुआ है। तीन दिन पूर्व मूसलाधार बारिश के दौरान नाले के तेज बहाव में लापता हुए 6 साल के दिव्यांग बच्चे प्रीत की तलाश गुरुवार दोपहर को पूरी हुई, जब उसका शव बरामद किया गया। स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ और नगर पालिका की संयुक्त टीमों ने तीन दिनों तक लगातार इस कठिन अभियान को अंजाम दिया। अपने इकलौते बेटे की मृत्यु की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में गम का माहौल है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

दिव्यांगता के बावजूद संघर्ष कर रहा था मासूम

पीड़ित परिवार मोहल्ला खेड़ा का निवासी है। नंदराम प्रजापति के 6 वर्षीय बेटे प्रीत की शारीरिक स्थिति सामान्य नहीं थी और वह एक पैर से दिव्यांग था। वह बिना वॉकर के चल नहीं पाता था। मंगलवार को हुई भीषण बारिश के समय वह अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरा था। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया और फायर ब्रिगेड व आपदा राहत दल की मदद से उसे ढूंढने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया था।

मंत्री की निगरानी और चेयरमैन का इनाम

इस पूरे बचाव कार्य की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह खुद पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बच्चे को किसी भी स्थिति में जल्द से जल्द खोजा जाए। घटनास्थल पर नगर पालिका अध्यक्ष आबिद अली ने स्वयं मोर्चा संभाला और पूरे अभियान का नेतृत्व किया। जनसहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से चेयरमैन आबिद अली ने यह घोषणा भी की थी कि जो भी व्यक्ति बच्चे के बारे में पुख्ता जानकारी देगा या उसकी तलाश में मदद करेगा, उसे 25 हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा।

वैज्ञानिक तरीके से हुई तलाश

बच्चे की बरामदगी के लिए प्रशासन ने अधिशासी अधिकारी प्रदीप गिरी की देखरेख में एक विशेष रणनीति तैयार की थी। इलाके का एक विशेष नक्शा बनाकर उन सभी संभावित जगहों को चिह्नित किया गया, जहां शव के बहकर रुकने की संभावना थी। स्थानीय गोताखोरों को इस ऑपरेशन में लगाया गया। आखिरकार, तीसरे दिन कड़ी मेहनत रंग लाई और बच्चे का शव ढूंढ लिया गया। परिजनों ने मौके पर पहुंचकर शव की पहचान की। हाल ही में नोएडा से भी इसी तरह की दुखद खबर सामने आई थी, जहां 27 साल के इंजीनियर आर्यन की ड्यूटी के दौरान खुले नाले में गिर जाने से जान चली गई थी।

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