महाराष्ट्र TET पेपर लीक: आगरा की प्रिंटिंग प्रेस की सुरक्षा में सेंध का खुलासा, लापरवाही से लीक हुए सवाल

महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच में ठाणे पुलिस की SIT को बड़ी सफलता मिली है। जांच में सामने आया है कि आगरा की प्रिंटिंग प्रेस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण पेपर लीक करना आसान हो गया।

महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में सुरक्षा चूक का बड़ा खुलासा

महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET के पेपर लीक कांड ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। मामले की गहराई से छानबीन कर रही ठाणे पुलिस की विशेष जांच टीम यानी SIT ने जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्यों को उजागर किया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा स्थित वह प्रिंटिंग प्रेस जहां ये गोपनीय प्रश्नपत्र छापे गए थे, वहां सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त थी। इसी सुरक्षा की कमी और गंभीर लापरवाही का लाभ उठाकर बदमाशों ने परीक्षा के प्रश्नपत्रों को प्रेस के भीतर से ही बाहर निकाल लिया। SIT की जानकारी के अनुसार, दिल्ली में मुख्यालय वाली महिम पत्रण लिमिटेड की आगरा यूनिट पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग की विभिन्न परीक्षाओं के लिए पेपर छापने का काम संभाल रही थी। इतना ही नहीं, यह प्रेस देशभर की कई अन्य अति संवेदनशील और गोपनीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भी छापने का काम करती रही है।

प्रिंटिंग प्रेस में सुरक्षा मानकों की अनदेखी

जांच के दौरान SIT को यह पता चला कि जिस स्थान पर इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार हो रहे थे, वहां सुरक्षा के बुनियादी नियम भी नहीं अपनाए गए थे। प्रेस के भीतर कई ऐसे संवेदनशील क्षेत्र थे जहां CCTV कैमरे तक नहीं लगाए गए थे, जिससे किसी भी गतिविधि पर नजर रखना नामुमकिन था। इसके अलावा, कर्मचारियों के अंदर आने और बाहर जाने के दौरान उनकी उचित तलाशी तक नहीं ली जाती थी, जिसका फायदा उठाकर गोपनीय कागजात बाहर ले जाना सरल हो गया। पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, कंपनी के ही कर्मचारी बाबूलाल कुशवाहा और नरेश महावर उर्फ निक्की ने TET के प्रश्नपत्र प्रेस से चुराए और फिर उन्हें कंपनी के ही पूर्व कर्मचारी सोनू कुमार दिवाकर तक पहुंचाया। आरोपी सोनू ने इन पत्रों की फोटोकॉपी तैयार की और मुख्य साजिशकर्ता बिजेंद्र गुप्ता के निर्देश पर उन्हें उन अन्य आरोपियों तक पहुंचाया, जो इन पेपरों को बेचने के लिए महाराष्ट्र पहुंचे थे।

एक और आरोपी की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत

इस मामले में कार्रवाई करते हुए सोमवार को भिवंडी अदालत में सरेंडर करने वाले सोनू कुमार दिवाकर को SIT ने हिरासत में लिया है। मंगलवार को उसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायाधीश ने उसे आगे की गहन पूछताछ के लिए 2 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। जांच से यह तथ्य भी सामने आया है कि सोनू ने वर्ष 2018 में महिम पत्रण लिमिटेड की अपनी नौकरी छोड़ दी थी, इसके बावजूद वह मुख्य मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता के साथ लगातार संपर्क में बना रहा। पुलिस की टीम का मानना है कि इस पूरे पेपर लीक कांड की साजिश इन दोनों के बीच ही रची गई थी।

महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारी की संलिप्तता का शक

जांच के दायरे में अब महाराष्ट्र सरकार का एक कर्मचारी भी आ गया है। SIT के अनुसार, पुणे का एक फरार संदिग्ध व्यक्ति महाराष्ट्र सरकार के एक विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत है। पुलिस की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस व्यक्ति ने लीक हुए प्रश्नपत्र को खरीदने में काफी दिलचस्पी दिखाई थी। छानबीन में यह भी पता चला है कि यह संदिग्ध व्यक्ति लगभग 60 ऐसे अभ्यर्थियों के संपर्क में था, जो कथित तौर पर लीक हुए पेपरों को खरीदने के लिए तैयार थे।

मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता की तलाश और नेटवर्क का पर्दाफाश

महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता से लगातार पूछताछ का दौर जारी है। इस मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए भिवंडी पुलिस की एक टीम आरोपी को साथ लेकर बिहार के समस्तीपुर पहुंची है। पुलिस का उद्देश्य वहां उसके अन्य साथियों का पता लगाना और इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करना है। इसके अलावा, ठाणे पुलिस आयुक्तालय की भिवंडी पुलिस की अन्य टीमें महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में उन लोगों की तलाश कर रही हैं, जिन्होंने परीक्षा से पहले इन पेपरों को खरीदने की योजना बनाई थी।

अब तक 15 लोगों की गिरफ्तारी

SIT की अब तक की जांच में एक बेहद गंभीर बात सामने आई है कि जिस प्रिंटिंग प्रेस को पिछले 20 से 30 सालों से सरकारी परीक्षाओं के पेपर छापने का ठेका मिलता आ रहा था, वहां कभी भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए गए। जांच टीम इस बात पर भी सवाल उठा रही है कि महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने इतने संवेदनशील कार्यों के लिए सालों से इसी प्रेस को ठेका कैसे जारी रखा। इस मामले में अभी तक कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें मुख्य आरोपी, उसके करीबी सहयोगी और आगरा की प्रिंटिंग प्रेस के वे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने पेपर बाहर निकालने में मदद की थी।

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