सावन में शिवमय होगा बिलासपुर: दर्शन के लिए जरूर जाएं ये 5 ऐतिहासिक और चमत्कारी शिव मंदिर

पवित्र सावन के महीने में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित प्राचीन शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। यदि आप भी महादेव की भक्ति में लीन होना चाहते हैं, तो बिलासपुर के इन पांच प्रमुख मंदिरों के दर्शन करना आपके लिए एक यादगार अनुभव हो सकता है।

सावन की फुहारों के बीच बिलासपुर में शिवभक्ति की बयार

सावन का पवित्र महीना आते ही छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का वातावरण भगवान शिव की भक्ति से सराबोर हो जाता है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक स्थित देवालयों में भक्तों का रेला उमड़ पड़ता है और चारों ओर 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगते हैं। बिलासपुर केवल अपनी भौगोलिक स्थिति के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिरों के लिए भी पूरे प्रदेश में जाना जाता है। इन मंदिरों में न केवल आस्था का सैलाब उमड़ता है, बल्कि यहाँ की सदियों पुरानी वास्तुकला और ऐतिहासिक गौरव भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। यदि आप सावन के इस पावन अवसर पर शिव दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो बिलासपुर के ये पांच मंदिर आपकी सूची में अवश्य होने चाहिए।

मल्हार का पातालेश्वर महादेव मंदिर

बिलासपुर से थोड़ी दूरी पर स्थित मल्हार का पातालेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनूठी संरचना के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका भूमिगत गर्भगृह है, जो करीब 10वीं शताब्दी का माना जाता है। यह स्थान कलचुरी कालीन स्थापत्य कला का एक जीवंत उदाहरण है। मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई दुर्लभ मूर्तियां और शिलालेख न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र हैं, बल्कि पुरातत्व प्रेमियों के लिए शोध का विषय भी हैं। इस मंदिर के पास स्थित संग्रहालय भी इतिहास को समझने में काफी मदद करता है, जहाँ कलचुरी काल की उत्कृष्ट शिल्पकला देखी जा सकती है।

पौराणिक कथाओं से जुड़ा भीम किचक शिव मंदिर

मल्हार क्षेत्र में ही स्थित 'भीम किचक शिव मंदिर' आस्था और पौराणिक इतिहास का एक अद्भुत संगम है। जनश्रुतियों के अनुसार, इस मंदिर का सीधा संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान भीम ने इसी स्थान पर किचक का वध किया था। इस मंदिर की बनावट में कलचुरी काल की बारीकी साफ नजर आती है। पत्थरों पर की गई नक्काशी इतनी सूक्ष्म है कि वह प्राचीन कारीगरों के कौशल को दर्शाती है। सावन के दौरान यहाँ शिव भक्तों की भारी भीड़ जुटने के कारण पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है।

रतनपुर के बूढ़ा महादेव का रहस्य

रतनपुर में स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर, जिसे वृद्धेश्वरनाथ के नाम से भी जाना जाता है, शिव भक्तों के लिए एक आस्था का बड़ा केंद्र है। यह मंदिर लगभग 12वीं शताब्दी में अस्तित्व में आया था और यहाँ विराजमान शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है। इस मंदिर के साथ कई रहस्यमयी कथाएं जुड़ी हुई हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि शिवलिंग पर जलाभिषेक के दौरान चढ़ाया गया जल रहस्यमयी तरीके से अदृश्य हो जाता है। सावन के महीने में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

अष्टमुखी शिव मंदिर की विशिष्टता

बिलासपुर शहर के भीतर स्थित अष्टमुखी शिव मंदिर अपनी तरह का एक अनूठा केंद्र है। इस मंदिर की सबसे बड़ी आकर्षण की वजह भगवान शिव की दुर्लभ 8 मुखों वाली प्रतिमा है। ऐसी प्रतिमाएं बहुत कम देखने को मिलती हैं, जो इस मंदिर को अन्य शिव मंदिरों से अलग और खास बनाती हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ इस मंदिर की वास्तुकला भी भक्तों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। सावन के पवित्र दिनों में यहां होने वाली विशेष पूजा और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण शिव की ऊर्जा से भर जाता है।

102 साल पुरानी आस्था का केंद्र चांटीडीह शिव मंदिर

बिलासपुर शहर के चांटीडीह में स्थित शिव मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और प्रतिष्ठित स्थल है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 102 वर्ष पुराना है। स्थानीय लोगों की इस मंदिर के प्रति गहरी निष्ठा है और सावन के महीने के साथ-साथ अन्य त्योहारों पर भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महाशिवरात्रि के मौके पर यहाँ तीन दिवसीय विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का मिलन

बिलासपुर के ये पांचों मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान ही नहीं हैं, बल्कि ये छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और इतिहास के संवाहक भी हैं। पातालेश्वर महादेव की भूमिगत वास्तुकला से लेकर चांटीडीह की प्राचीन परंपराओं तक, इन मंदिरों की यात्रा आपको एक आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराएगी। सावन के इस महीने में यदि आप अपने परिवार के साथ शिव दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रसिद्ध स्थलों को जरूर देखें। महादेव की कृपा और इन मंदिरों की सकारात्मक ऊर्जा आपकी यात्रा को निश्चित रूप से सार्थक बना देगी।

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