अदालत का कड़ा रुख
जम्मू-कश्मीर में आतंक की साजिश रचने वालों के खिलाफ कानून का पहिया तेजी से घूम रहा है। कटरा और नरवाल में हुए भीषण बम धमाकों के मुख्य आरोपी आतंकी मोहम्मद कासिम उर्फ सलमान के खिलाफ विशेष अदालत ने बड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने कासिम को आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आतंकी फिलहाल पाकिस्तान में शरण लिए हुए है और वहीं से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है।
गांव में चस्पा किया गया आदेश
शनिवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक विशेष टीम उपमंडल पुलिस अधिकारी पारुल भारद्वाज के नेतृत्व में रियासी जिले के अंगराला गांव पहुंची, जो इस आतंकी का पैतृक गांव है। पुलिस ने वहां पहुंचकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 84 के तहत अदालत के आदेश को सार्वजनिक किया। गांव के गणमान्य लोगों और स्थानीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अदालत के फैसले की जानकारी दी गई। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी को कानूनी कार्रवाई की गंभीरता का आभास हो।
21 अगस्त की डेडलाइन
विशेष एनआईए अदालत ने मोहम्मद कासिम को निर्देश दिया है कि वह आगामी 21 अगस्त तक हर हाल में अदालत में हाजिर हो। यदि वह इस निर्धारित समय सीमा के भीतर कानून के सामने समर्पण नहीं करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 85 के तहत कठोर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक कानूनी नोटिस नहीं है, बल्कि उस आतंकी के लिए चेतावनी है जिसने क्षेत्र की शांति को भंग करने का प्रयास किया है।
आतंकी का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड
मोहम्मद कासिम सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका नाम कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है। वह गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज कई गंभीर मामलों में वांछित है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह साफ हो चुका है कि साल 2022-23 के दौरान कटरा और नरवाल में हुए दोहरे बम धमाकों की साजिश के पीछे कासिम का हाथ था। एजेंसियों का मानना है कि वह सीमा पार से बैठकर जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए लगातार सक्रिय है।
जनता से सहयोग की अपील
पुलिस ने स्थानीय निवासियों से आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी नागरिक को मोहम्मद कासिम के वर्तमान ठिकाने, उसकी गतिविधियों या उससे जुड़ी कोई भी गोपनीय जानकारी प्राप्त होती है, तो उसे तुरंत अपने निकटतम पुलिस थाने में सूचित करना चाहिए। सुरक्षा बलों का मानना है कि जनता की सतर्कता और सहयोग से ही इन वांछित अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा।
कानूनी विकल्पों का खात्मा
फिलहाल यह आतंकी पाकिस्तान में छिपा हुआ बताया जा रहा है, जो जांच एजेंसियों के इनपुट पर आधारित है। अदालत के इस नवीनतम आदेश के बाद अब कासिम के पास कानूनी तौर पर बहुत कम विकल्प बचे हैं। उसे या तो भारतीय कानून के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा या फिर अपनी अनुपस्थिति में होने वाली कठोर न्यायिक कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। सुरक्षा तंत्र अब उसके खिलाफ अपनी पकड़ और अधिक मजबूत कर रहा है।
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