सदन में निशांत कुमार का पहला संबोधन
बिहार विधानमंडल के मॉनसून सत्र के आगाज के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हुई है। बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री और नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने बतौर विधान परिषद सदस्य सदन में कदम रखा और पहली बार सदन को संबोधित किया। उनके संबोधन के दौरान सदन का माहौल पूरी तरह शांत रहा और सभी सदस्य उन्हें ध्यानपूर्वक सुनते रहे। अपनी बात की शुरुआत में उन्होंने सभापति के प्रति सम्मान व्यक्त किया और सभी सदस्यों का गर्मजोशी से अभिवादन किया।
लोकतांत्रिक गरिमा और युवा सदस्यों से अपील
निशांत कुमार ने अपने भाषण में सदन की मर्यादा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि हम सभी को एक टीम की तरह मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि राज्य की लोकतांत्रिक परंपराएं और अधिक सशक्त हो सकें। विशेष रूप से उन युवा सदस्यों का स्वागत करते हुए जो पहली बार सदन का हिस्सा बने हैं, उन्होंने कहा कि हर सदस्य को इस सदन की समृद्ध विरासत और गौरव को सदैव स्मरण रखना चाहिए। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सदन की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास करें।
न्याय के साथ विकास का संकल्प
निशांत कुमार ने अपने संबोधन का एक बड़ा हिस्सा 'न्याय के साथ विकास' के उस मूल मंत्र को समर्पित किया, जिसे उनके पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते 20 वर्षों तक शासन का आधार बनाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी संकल्प के साथ राज्य की सरकार ने निरंतर काम किया है और आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उसी विचारधारा को पूरी ईमानदारी के साथ आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह विकास यात्रा इसी प्रकार निरंतर जारी रहेगी।
दो दशकों के कार्यों पर प्रकाश
अपने संबोधन के दौरान निशांत कुमार ने पिछले दो दशकों के दौरान बिहार में हुए आमूलचूल परिवर्तनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और रोजगार जैसे अहम क्षेत्रों में सरकार ने उल्लेखनीय काम किए हैं। दलित, महादलित, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक, युवाओं और महिलाओं के उत्थान के लिए जो नीतियां बनाई गईं, उन्होंने समाज में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण, शराबबंदी, जीविका परियोजना और जल-जीवन-हरियाली जैसी पहलों का जिक्र किया और कहा कि इन योजनाओं ने बिहार को वैश्विक पटल पर एक अलग पहचान दिलाई है।
सामाजिक परिवर्तन और राजनीति का उद्देश्य
निशांत ने इस बात पर जोर दिया कि उनके पिता ने अपने 20 साल के शासनकाल में यह साबित किया कि राजनीति का असली उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त जरिया बनाना है। उन्होंने कहा कि राजनीति के माध्यम से ही वंचित और शोषित वर्गों को मुख्यधारा में लाया जा सकता है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कुशल नेतृत्व में इस सुशासन की परंपरा को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।
भविष्य की रणनीति और केंद्र का सहयोग
निशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि भले ही नीतीश कुमार ने राज्यसभा न जाने का निर्णय लिया हो, लेकिन गठबंधन और राज्य सरकार को उनका मार्गदर्शन भविष्य में भी लगातार प्राप्त होता रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से बिहार को एक विकसित और समृद्ध राज्य बनाने का सपना अवश्य साकार होगा। अंत में, निशांत कुमार ने उन सभी सदस्यों का आभार जताया जिन्होंने उनका अभिनंदन किया और कहा कि सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
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