बिहार के रणजी फैंस के लिए बड़ी खबर: अब राजगीर स्टेडियम में होगा क्रिकेट का रोमांच, वैभव सूर्यवंशी की भी एंट्री संभव

रणजी ट्रॉफी के आगामी सत्र में बिहार क्रिकेट टीम अपने तीन घरेलू मैच पटना की जगह राजगीर में खेलेगी। राज्य सरकार ने इसकी अनुमति दे दी है, हालांकि स्टेडियम का निर्माण कार्य जारी रहने के कारण दर्शक फिलहाल मैच का सीधा आनंद नहीं ले पाएंगे।

राजगीर में सजने वाला है रणजी ट्रॉफी का मंच

बीसीसीआई द्वारा आयोजित की जाने वाली रणजी ट्रॉफी के नए सत्र में बिहार क्रिकेट टीम के लिए एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस बार बिहार की टीम एलीट ग्रुप में अपना जौहर दिखाएगी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार को कुल तीन मैचों की मेजबानी करने का मौका मिला है। अब तक घरेलू मैच पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में आयोजित किए जाते थे, लेकिन इस बार खेल का स्थान बदल दिया गया है। इन तीनों महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए राजगीर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को चुना गया है। बिहार सरकार ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है और वहां तैयारियां भी युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई हैं।

मैचों की समयसारिणी और विपक्षी टीमें

बिहार क्रिकेट संघ के सचिव जियाउल आरफीन ने जानकारी दी है कि रणजी ट्रॉफी के तीन घरेलू मैच बिहार में आयोजित होंगे और ये सभी मैच राजगीर के मैदान पर होंगे। बिहार का पहला मुकाबला 11 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के खिलाफ निर्धारित है। इसके बाद टीम 17 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के साथ अपना दमखम दिखाएगी। वहीं, बिहार का तीसरा घरेलू मैच 24 जनवरी को विदर्भ के विरुद्ध खेला जाएगा।

इन मैचों में टीम के प्रमुख खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के खेलने की संभावना पर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। जियाउल आरफीन के अनुसार, यदि रणजी ट्रॉफी के दौरान वैभव सूर्यवंशी भारतीय टीम की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में व्यस्त नहीं रहते हैं, तो उनके बिहार की ओर से खेलने की पूरी संभावना है।

स्टेडियम निर्माण और दर्शकों पर प्रतिबंध

राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीसीए के सचिव ने बताया कि सरकार ने अक्टूबर से लेकर जनवरी तक के लिए पिच और पवेलियन के उपयोग की अनुमति दे दी है। फिलहाल मोइनुल हक स्टेडियम का कायाकल्प किया जा रहा है और वहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नया स्टेडियम तैयार हो रहा है। राजगीर की बात करें, तो वहां का पवेलियन और मुख्य मैदान पूरी तरह तैयार है, लेकिन दर्शकों के लिए स्थिति अलग है। स्टेडियम में अभी दर्शक दीर्घा का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है, इसलिए इस बार फैंस को स्टेडियम के अंदर बैठकर मैच देखने का मौका नहीं मिलेगा।

मैदान की तकनीक और विशेषताएं

स्टेडियम की तैयारियों पर नजर रख रहे बीसीए के पिच क्यूरेटर हिमांशु कुमार ने बताया कि राजगीर स्टेडियम में कुल 13 पिचें तैयार की गई हैं। इन पिचों की विशेषता यह है कि 7 पिचें पटना की काली मिट्टी से बनी हैं, जबकि 6 पिचें मुंबई की लाल मिट्टी का उपयोग करके तैयार की गई हैं। बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर की देखरेख में पूरा काम हो रहा है। इस मैदान की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक ड्रेनेज व्यवस्था है। यह मैदान पूरी तरह सैंड-बेस्ड आउटफील्ड पर विकसित किया गया है, जिसके कारण भारी बारिश के बाद भी मैदान महज आधे घंटे के भीतर दोबारा खेलने लायक हो जाता है।

बाउंड्री और पिच का मापदंड

स्टेडियम की बाउंड्री को लेकर भी बीसीसीआई के नियमों का पूरा पालन किया गया है। दोनों पवेलियन एंड की बाउंड्री 72 गज रखी गई है, जबकि स्क्वायर साइड की बाउंड्री 84-84 गज है। क्यूरेटर हिमांशु कुमार ने बताया कि सभी पांच मुख्य पिचों से बाउंड्री की दूरी लगभग बराबर रखी गई है ताकि खेल में संतुलन बना रहे और किसी एक तरफ झुकाव न हो। यह मैदान आईसीसी के सभी वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में यहां बड़े टूर्नामेंट कराए जा सकें।

पुरानी तकनीक बनाम नई तकनीक

मोइनुल हक स्टेडियम का जिक्र करते हुए यह बताया गया कि वहां की पिच पहले मल्टी-लेयर तकनीक पर आधारित थी, जिसमें मिट्टी, बोल्डर और बालू की कई परतें होती थीं। हालांकि 2022 के बाद बीसीसीआई ने नियमों में बदलाव करते हुए टू-लेयर विकेट का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। अब नई तकनीक के तहत सबसे नीचे 4 इंच लाल बालू की परत बिछाई जाती है और उसके ऊपर 8 इंच मिट्टी डाली जाती है। मोइनुल हक स्टेडियम का पुराना आउटफील्ड मिट्टी और घास से बना था, जिसे सुखाने में काफी समय लगता था। अब वहां के ग्राउंड को 6 से 10 फीट तक ऊंचा करने का काम चल रहा है ताकि इसे एक आधुनिक रूप दिया जा सके।

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