रांची के किसान श्याम की अनोखी गारंटी, 1 एकड़ खेत से 3 टन बैंगन की बंपर पैदावार और एक भी फल नहीं सड़ेगा

झारखंड की राजधानी रांची के प्रगतिशील किसान श्याम ने बैंगन की खेती का एक ऐसा सफल फार्मूला ईजाद किया है, जिससे बंपर पैदावार के साथ फसल की बर्बादी भी शून्य हो जाती है। उनकी जैविक तकनीक से तैयार बैंगन न केवल गुणवत्ता में बेहतर हैं, बल्कि एक भी फल सड़ने की समस्या नहीं आती।

बैंगन की खेती में सफलता का नया मंत्र

झारखंड की राजधानी रांची में खेती के क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश किया गया है। यहाँ रहने वाले किसान श्याम ने बैंगन की खेती को लेकर एक ऐसी गारंटी दी है जो किसी भी किसान को हैरान कर सकती है। श्याम का दावा है कि उनकी वैज्ञानिक और जैविक खेती की तकनीक से 1 एकड़ जमीन से आसानी से 3 टन तक बैंगन का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस विधि से उगने वाले बैंगन में से एक भी फल सड़ा हुआ नहीं निकलता। किसान श्याम ने अपनी इस विशेष तकनीक के बारे में विस्तार से बताया है, जिससे खेती में नुकसान की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।

मिट्टी की उर्वरता और खाद का सही चयन

किसान श्याम के अनुसार, बैंगन के फल सड़ने के मुख्य रूप से दो ही कारण होते हैं, जिनमें पहला मिट्टी की कम उर्वरता और दूसरा पानी का असंतुलित प्रबंध है। उन्होंने बताया कि उनकी तकनीक में वे साधारण खाद के बजाय नीम की खली और सरसों की खली से तैयार विशेष जैविक खाद का उपयोग करते हैं। इस खाद में थोड़ा गोमूत्र मिलाकर खेतों में डालने से कीटों का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाता है। श्याम का मानना है कि यदि किसान नीम और सरसों की खली के मिश्रण का सही इस्तेमाल करें, तो फसल में कीड़ों का हमला बिल्कुल नहीं होगा।

मल्चिंग पेपर की अनिवार्य भूमिका

खेती को आधुनिक रूप देते हुए श्याम मल्चिंग पेपर के इस्तेमाल पर सबसे अधिक जोर देते हैं। वे कहते हैं कि मल्चिंग पेपर का उपयोग करना बैंगन की सफल खेती के लिए अनिवार्य है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि खेत में अनावश्यक खरपतवार नहीं उगते। साथ ही, किसान जो भी पानी या खाद पौधों को देता है, वह सीधे जड़ों तक पहुँचता है, जिससे पोषक तत्वों का कोई अपव्यय नहीं होता। मल्चिंग तकनीक न केवल उपज बढ़ाती है, बल्कि कीड़े लगने की संभावना को भी काफी हद तक कम कर देती है।

सुरक्षा और पौधों का प्रबंधन

फसल को बाहरी खतरों से बचाने के लिए श्याम ने खेत के चारों तरफ सुरक्षा जाली का घेरा बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेत में आवारा पशुओं या छोटे जानवरों का प्रवेश फसल की गुणवत्ता को खराब कर सकता है, क्योंकि जानवर खेत में गंदगी फैलाते हैं और यही गंदगी बाद में कीटों को जन्म देने का काम करती है। कई किसान इस छोटी सी बात को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें फसल के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है। इसलिए खेत की घेराबंदी करना बेहद जरूरी है।

पानी की उपलब्धता और पौधों को सहारा

सिंचाई के बारे में बात करते हुए श्याम बताते हैं कि गर्मी के दिनों में वे पौधों को दिन में तीन बार पानी देते हैं ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। इसके अलावा, एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावी तकनीक है पौधों को स्टिक यानी लकड़ी का सहारा देना। श्याम के मुताबिक, बैंगन के पौधे की टहनियां कभी भी जमीन को नहीं छूनी चाहिए। यदि फल या पौधा जमीन के संपर्क में आता है, तो उसमें दाग लग जाते हैं और कीड़े लगने का खतरा बढ़ जाता है। स्टिक का सहारा देने से पौधे ऊपर की तरफ बढ़ते हैं और फल स्वस्थ रहते हैं। सामान्य गोबर खाद या केंचुआ खाद के साथ इन सभी छोटे-छोटे सुझावों को अपनाने पर कोई भी किसान अपनी फसल को कीड़ों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकता है और पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी देख सकता है।

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