बिहार के शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव, अब डिग्री कॉलेज विश्वविद्यालयों के अधीन नहीं रहेंगे

बिहार सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक नियंत्रण से मुक्त किया जाएगा।

उच्च शिक्षा में प्रशासनिक सुधार

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक नए कानून की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में तैयार किए जा रहे इस कानून के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। यह कदम शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक स्वायत्त और व्यवस्थित बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

विश्वविद्यालयों से अलग होंगे डिग्री कॉलेज

इस प्रस्तावित कानून की सबसे बड़ी विशेषता राज्य के 500 से अधिक अंगीभूत यानी कॉन्स्टिट्यूएंट डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक दायरे से बाहर करना है। अभी तक ये कॉलेज विश्वविद्यालयों के नियंत्रण में काम करते हैं, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद इनकी प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से कॉलेजों का प्रबंधन और शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर होगी।

शिक्षकों के राजनीति में आने पर प्रतिबंध

शिक्षा संस्थानों की गरिमा बनाए रखने और शिक्षण कार्य पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए सरकार कड़ा रुख अपना रही है। नए कानून के तहत उन सभी प्रोफेसरों और शिक्षकों पर चुनाव लड़ने या सक्रिय राजनीति में भाग लेने पर रोक लगा दी जाएगी जो राज्य के कॉलेजों में कार्यरत हैं। यह नियम लागू होने के बाद शिक्षकों को अपने पद पर बने रहने के लिए राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह दूरी बनानी होगी।

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