बिहार सरकार का सख्त रुख
बिहार में अब पंचायतों के कामकाज को लेकर सरकार ने कड़ा रवैया अपना लिया है। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही, नियमों का उल्लंघन या घटिया सामग्री का इस्तेमाल अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने राज्य के सभी जिलों को आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं कि विकास कार्यों की बारीकी से जांच की जाए और लापरवाही करने वालों की सूची तैयार की जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर गिरेगी गाज
पंचायती राज विभाग के नए आदेश के अनुसार, जिन पंचायतों में सरकारी विकास योजनाओं की राशि का 1 फीसदी से भी कम खर्च हुआ है, उन क्षेत्रों के मुखिया और पंचायत सचिवों की जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, विभाग ने 15 लाख रुपये से अधिक की लागत वाली योजनाओं पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं। यदि इन योजनाओं में बिना टेंडर के काम किया गया या नियमों की अनदेखी पाई गई, तो संबंधित अफसरों पर विभागीय कार्रवाई होना तय है।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और एजेंसियों पर सख्ती
सरकार जर्जर पंचायत भवनों की स्थिति को लेकर भी गंभीर है। निर्माण और मरम्मत के कार्यों में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि घटिया काम करने वाली निर्माण एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक धन का सदुपयोग और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिला प्रशासन को नियमित रूप से इन कार्यों की मॉनिटरिंग करने और गड़बड़ी पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
बेहतर काम करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहन
सरकार ने सिर्फ दंड का ही प्रावधान नहीं रखा है, बल्कि बेहतर काम करने वाली पंचायतों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था भी की है। जो पंचायतें समय सीमा के भीतर योजनाओं को पूरा करेंगी और गुणवत्ता का मानक बनाए रखेंगी, उन्हें भविष्य की विकास योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। इस कदम से पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है, जिससे धरातल पर काम में तेजी आएगी।
अगले साल होंगे पंचायत चुनाव
बिहार में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है। वर्तमान में राज्य में पंचायत चुनाव इस साल आयोजित नहीं किए जाएंगे। सरकार ने इन चुनावों को करीब एक साल के लिए टालने का निर्णय लिया है। वर्तमान में पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन का कार्य किया जा रहा है, जिसके बाद ही अगले वर्ष चुनाव होने की संभावना है। तब तक मौजूदा पंचायत प्रतिनिधि ही अपने पदों पर बने रहेंगे और अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
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