वार्ता पर विराम
ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत करने की उसकी कोई योजना नहीं है। तेहरान ने इस बात पर जोर दिया है कि इस समय उसकी शीर्ष प्राथमिकता केवल देश की सुरक्षा और रक्षा करना है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बड़ा बयान दिया। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिरोध काफी गहरा गया है। ईरान की आधिकारिक मीडिया एजेंसी प्रेस टीवी के अनुसार, प्रवक्ता ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान अब उस समझौता ज्ञापन (MoU) के पालन के लिए खुद को बाध्य नहीं समझता, जिसे क्षेत्र में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए तैयार किया गया था।
बातचीत से पीछे हटने की वजह
प्रवक्ता इस्माइल बगई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक अमेरिका 17 जून को संपन्न हुए MoU में किए गए अपने वादों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान नहीं करता, तब तक तेहरान किसी भी हालत में बातचीत की मेज पर वापस नहीं आएगा। उन्होंने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि, 'फिलहाल हमारी बातचीत करने की कोई मंशा या योजना नहीं है। इस वक्त हमारा पूरा ध्यान केवल राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत करने पर है।' यह टिप्पणी उन अमेरिकी दावों के जवाब में दी गई है जिनमें यह कहा जा रहा था कि अमेरिकी सैन्य अभियानों के कारण ईरान अंततः फिर से बातचीत के लिए मजबूर हो जाएगा। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर कोई समझौता नहीं करेगा और अमेरिका युद्ध के दम पर इस रास्ते को नहीं खुलवा सकता।
समझौते के उल्लंघन का आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने समझौते की शुरुआत से ही अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया है। यही कारण है कि ईरान ने भी अपने दायित्वों पर दोबारा विचार करने का फैसला लिया है। प्रवक्ता ने कहा, 'कोई भी समझौता ज्ञापन दोनों पक्षों की आपसी प्रतिबद्धताओं और भरोसे पर टिका होता है। यदि दूसरा पक्ष अपने वादों का उल्लंघन करता है, तो हम भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं रहते। यह एक स्थापित सिद्धांत है और हम इसी नीति पर आगे भी कायम रहेंगे। अमेरिका ने समझौते के पहले ही अनुच्छेद से अपनी गलत नीतियां और बदनीयती स्पष्ट कर दी थी।'
सैन्य टकराव के लिए तैयारी
इस्माइल बगई ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के किसी भी प्रकार के दबाव का मुकाबला करने के लिए ईरान की जनता पूरी तरह से सरकार के साथ खड़ी है। उन्होंने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान पर कोई भी सैन्य हमला किया गया, तो ईरानी सेना इसका मुंहतोड़ और करारा जवाब देने में सक्षम है। बगई के अनुसार, 'हमारी सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमलावर का पूरी ताकत के साथ सामना करेंगी। अगर वे हमला करते हैं, तो उन्हें भी जवाबी हमले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।'
अमेरिका और ईरान का आमना-सामना
यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब अमेरिका लगातार ईरान के तटीय क्षेत्रों में सैन्य हमले कर रहा है। अमेरिका का तर्क है कि इन अभियानों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका प्रयोग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है। ईरान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि 14 सूत्रीय एमओयू के अनुच्छेद-5 के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन और आवागमन की जिम्मेदारी तेहरान के पास है। हाल ही में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के बुनियादी ढांचे और समुद्री संपत्तियों को निशाना बनाए जाने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट और तनाव अपने चरम पर है।
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