चीन के लिए दक्षिण एशिया में सुरक्षा संकट
पड़ोसी देशों के प्रति चीन का आक्रामक रवैया अब खुद बीजिंग के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विस्तारवादी सोच के कारण आसपास के देश अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर हो गए हैं। चीन को यह गलतफहमी है कि उसके पड़ोसी क्षेत्रों पर उसका अधिकार है, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों ने चीन की इस दादागिरी पर लगाम लगाना शुरू कर दिया है।
ब्रह्मोस मिसाइल का जाल
भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस अब चीन के घेराबंदी का मुख्य आधार बन गई है। फिलिपींस के बाद अब वियतनाम ने भी भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का आधिकारिक समझौता किया है। वहीं, इंडोनेशिया ने भी इस मिसाइल प्रणाली को लेकर एक सहमति पत्र यानी MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के कारण चीन अब एक तरह से 'मिसाइल स्ट्रिंग' में फंसता जा रहा है।
ताइवान और अमेरिका की नई रणनीति
चीन की धमकियों के बीच ताइवान ने भी अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ताइवान अब अमेरिका से 100 हार्पून मिसाइलें खरीदने की तैयारी कर रहा है। इन सामरिक घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन का एकाधिकार अब खत्म हो रहा है और पड़ोसी देश अब अपनी रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं।
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