सतना में विकास की बदहाल तस्वीर: लकवाग्रस्त महिला को चारपाई पर ढोकर ले जाना पड़ा अस्पताल

मध्यप्रदेश के सतना जिले में सड़क की जर्जर स्थिति के कारण एक बुजुर्ग महिला को ग्रामीणों ने खाट पर लादकर डेढ़ किलोमीटर तक पैदल सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सड़क की बदहाली ने खोली विकास के दावों की पोल

मध्यप्रदेश के सतना जिले से आई एक विचलित कर देने वाली घटना ने जमीनी हकीकत और सरकारी दावों के बीच के अंतर को जगजाहिर कर दिया है। जिला मुख्यालय से दूर कोठी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गौरैया के रामपुरा गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने एक बीमार बुजुर्ग की जान को जोखिम में डाल दिया। शनिवार को जब एक महिला को लकवा (पैरालिसिस) का गंभीर दौरा पड़ा, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत महसूस हुई। लेकिन, गांव तक जाने वाली सड़क की दुर्दशा इतनी खराब थी कि कोई भी वाहन वहां तक नहीं पहुंच सका। विवश होकर परिजनों को महिला को चारपाई पर लिटाकर अस्पताल ले जाने का कठिन फैसला लेना पड़ा।

डेढ़ किलोमीटर की संघर्षपूर्ण यात्रा

महिला को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कीचड़ से लथपथ और गहरे गड्ढों वाली कच्ची पगडंडी पर करीब डेढ़ किलोमीटर तक चारपाई को कंधे पर उठाकर ग्रामीण आगे बढ़े। मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद ही वाहन की व्यवस्था हो सकी, जिसके माध्यम से महिला को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इस पूरी घटना का दृश्य सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और सड़क निर्माण की नीतियों पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि यह क्षेत्र नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसके बावजूद यहां के निवासियों को ऐसी दुर्दशा झेलनी पड़ रही है।

100 परिवारों की रोजमर्रा की चुनौती

रामपुरा गांव की आबादी की बात करें, तो यहां लगभग 100 परिवार निवास करते हैं। सड़क की बदहाली केवल एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि यह यहां के लोगों की दैनिक जिंदगी का कड़वा सच बन चुकी है। गांव की मुख्य संपर्क सड़क की लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर है, जो पिछले कई वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। बरसात के मौसम में तो यह रास्ता पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे मरीजों के साथ गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए घर से निकलना भी दुश्वार हो जाता है। एंबुलेंस तो दूर, यहां सामान्य दोपहिया वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।

दो दशकों से नहीं हुई मरम्मत

स्थानीय निवासी दुर्गेश त्रिवेदी का कहना है कि इस सड़क का निर्माण कार्य करीब 20 साल पहले लोक निर्माण विभाग द्वारा डब्ल्यूबीएम तकनीक से किया गया था। तब से लेकर आज तक इस मार्ग पर मरम्मत का एक भी काम नहीं हुआ। सड़क पूरी तरह से उखड़कर धूल और मिट्टी में मिल चुकी है। ग्रामीण कई बार सरपंच और सचिव से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवाय उन्हें कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों ने अब प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि यदि जल्द ही पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, तो आपातकालीन स्थितियों में वे और भी बड़ी आपदा का सामना करने को मजबूर होंगे।

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