छतरपुर और महोबा के गांवों में धूम मचा रहा 8वीं पास अशफाक का बिजनेस, मात्र 20 हजार रुपये से की थी शुरुआत

उत्तर प्रदेश के महोबा के रहने वाले अशफाक खान ने पढ़ाई छोड़कर सिर्फ 20 हजार रुपये की पूंजी से कपड़ों की फेरी लगाने का काम शुरू किया, जिससे वे आज आत्मनिर्भर बनकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

आज के समय में जब बहुत से युवा नौकरी की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं और रोजगार के लिए भटक रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के रहने वाले अशफाक खान ने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने दूसरों की तरह बड़े महानगरों की ओर रुख करने के बजाय अपने गृह क्षेत्र के आस-पास ही रहकर खुद का एक छोटा सा व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। अशफाक भले ही बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उनके भीतर व्यापार की बेहतरीन समझ है। वे पिछले 10 सालों से कपड़ों का व्यवसाय कर रहे हैं और अपनी मेहनत के दम पर हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं।

पढ़ाई में मन नहीं लगा, तो पिता के व्यवसाय से सीखी बारीकियां

अशफाक खान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के कुलपहाड़ इलाके के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि जब वे आठवीं कक्षा में थे, तभी उन्हें आभास हो गया था कि वे आगे पढ़ाई नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनका मन किताबों में नहीं लगता था। इसी वजह से उन्होंने केवल 8वीं तक पढ़ाई की और स्कूल छोड़ दिया। इसके बाद उनके परिवार वालों ने उन्हें कोई काम शुरू करने और पैसे कमाने की सलाह दी। अशफाक के अब्बा पहले से ही कपड़ों का व्यवसाय करते थे, इसलिए अशफाक को भी इसी काम में अपना भविष्य नजर आया। उन्होंने धीरे-धीरे अपने अब्बा के साथ रहकर इस व्यवसाय की बारीकियों और तौर-तरीकों को अच्छी तरह से सीखा।

मात्र 20 हजार रुपये की पूंजी से की शुरुआत

अशफाक के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी। उनके पास बड़ा निवेश करने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अलग-अलग जगहों से रुपये जोड़कर केवल 20 हजार रुपये जुटाए। इतनी छोटी रकम से बाजार में कोई दुकान किराए पर लेकर खोलना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने फेरी लगाने का अनोखा तरीका चुना। इस काम के लिए उन्होंने एक ऐसी बाइक का चयन किया जिसका माइलेज अच्छा हो और पेट्रोल कम लगे, क्योंकि उन्हें दिनभर अलग-अलग इलाकों में घूमना होता था। वे सुबह अपनी मोटरसाइकिल पर कपड़े लादकर निकल जाते हैं और सीधे ग्राहकों के दरवाजे तक पहुंचकर अपना माल बेचते हैं।

छतरपुर और महोबा के कस्बों में फैलाया अपना काम

अशफाक रहने वाले महोबा जिले के हैं, लेकिन वे रोजाना व्यापार करने के लिए मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के विभिन्न इलाकों में आते हैं। वे छतरपुर के प्रमुख कस्बों और गांवों जैसे राजनगर, लवकुश नगर, ईशानगर, हरपालपुर और महाराजपुर में घूम-घूमकर अपना माल बेचते हैं। वे मौसम और ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार कपड़े बेचते हैं, लेकिन उनके नियमित स्टॉक में मुख्य रूप से ये चीजें शामिल होती हैं:

  • कालीन जो फर्श पर बिछाने के काम आते हैं।
  • बेड शीट (चादरें) जिनकी मांग हर घर में हमेशा रहती है।
  • पायदान (मैट) जो दैनिक उपयोग की वस्तु है।
  • तकिया कवर जो बेड शीट के साथ खूब बिकते हैं।

संवाद कौशल और ग्राहक की परख है सबसे जरूरी

अशफाक के अनुसार, इस बिजनेस की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) आपकी बातचीत करने की शैली यानी कम्यूनिकेशन स्किल है। वे बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के पास केवल 10 से 20 हजार रुपये की बेहद सीमित पूंजी है, तो वह भी इस काम को आसानी से शुरू कर सकता है। लेकिन सफलता पाने के लिए उसे अपने बोलने के तरीके पर ध्यान देना होगा। आप अपने उत्पाद की खूबियों को जितने बेहतर तरीके से ग्राहकों के सामने रखेंगे, उतनी ही जल्दी वे सामान खरीदने के लिए आकर्षित होंगे। बातचीत के दौरान ग्राहक की आंखों के हाव-भाव को पढ़ना बहुत जरूरी होता है ताकि पता चल सके कि वह उत्पाद खरीदेगा या नहीं। यह पूरा बिजनेस बिक्री पर टिका है, इसलिए आपकी बातों में इतना दम होना चाहिए कि ग्राहक प्रभावित होकर सामान खरीद ही ले।

कमाई और बचत का गणित

अशफाक के पास ग्राहकों की पसंद और बजट के अनुसार अलग-अलग रेंज का सामान उपलब्ध रहता है। उनके माल की कीमत न्यूनतम 100 रुपये से लेकर अधिकतम 1 हजार रुपये तक होती है। इस वजह से हर तरह के ग्राहक उनसे सामान खरीदते हैं; कोई कम कीमत वाली चादर लेता है तो कोई अच्छी क्वालिटी का कालीन खरीदता है। अशफाक बताते हैं कि रोजाना मोटरसाइकिल का पेट्रोल खर्च निकालने के बाद भी उनकी 500 से 700 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है। इस प्रकार वे हर दिन आसानी से लगभग 1,000 रुपये तक की बिक्री कर लेते हैं और महीने में करीब 20 हजार रुपये की सम्मानजनक कमाई कर रहे हैं।

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