मध्य प्रदेश का सीधी जिला अपने भीतर कुदरत का एक ऐसा अनमोल खजाना समेटे हुए है, जिसकी ऐतिहासिक अहमियत बेहद खास है। यहां स्थित संजय टाइगर रिजर्व केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और बाघों के संरक्षण के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि इसका इतिहास दुनिया के पहले सफेद बाघ से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
सफेद बाघ 'मोहन' की ऐतिहासिक जन्मभूमि
इस अभ्यारण्य के पास एक ऐसा ऐतिहासिक गौरव है जो दुनिया में किसी और के पास नहीं है। यह क्षेत्र विश्व के पहले सफेद बाघ 'मोहन' की वास्तविक जन्मस्थली है। यही वह स्थान है जहां से सफेद बाघों की नस्ल का इतिहास शुरू हुआ था। इसके बावजूद, इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य और विरासत को वह प्रसिद्धि नहीं मिल सकी जो मिलनी चाहिए थी।
वन्यजीवों का सुरक्षित और समृद्ध बसेरा
यह पूरा इलाका विंध्य के सबसे महत्वपूर्ण और सघन वनों का हिस्सा है। जैव विविधता के मामले में इसे बेहद समृद्ध माना गया है। वर्तमान में संजय टाइगर रिजर्व कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण वन्यजीवों को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान कर रहा है। यहाँ पाए जाने वाले प्रमुख जीवों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- बाघ
- तेंदुआ
- भालू
- गौर
- सांभर
- चीतल
- जंगली कुत्ते
पहचान की जंग लड़ रहा है यह रिजर्व
विंध्य क्षेत्र की इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता की प्रचुरता के बाद भी, इस रिजर्व को लेकर एक बड़ी विडंबना सामने आती है। देश के अन्य बड़े और विख्यात टाइगर रिजर्व की तुलना में संजय टाइगर रिजर्व की पहचान आज भी काफी पीछे छूट गई है। पर्यटन और संरक्षण के मानचित्र पर इसे वह स्थान हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिसका यह वास्तव में हकदार है।
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