"कश्यप ऋषि से जुड़े आयोजन के लिए मैं कहीं भी जा सकता हूँ": पुस्तक विमोचन पर बोले बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन

पटना के जगजीवन शोध संस्थान में डॉ. प्रो. राजेंद्र प्रसाद शर्मा की पुस्तक 'कश्यप का जीवन और दर्शन' के विमोचन पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कश्मीर से अपने गहरे जुड़ाव और प्रदेश में सामाजिक एकता पर बल दिया।

बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने लेखक डॉक्टर प्रो राजेंद्र प्रसाद शर्मा द्वारा रचित पुस्तक ‘कश्यप का जीवन और दर्शन’ का औपचारिक विमोचन किया। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन पटना के प्रसिद्ध जगजीवन शोध संस्थान में किया गया था, जहां साहित्य और समाज से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर बोलते हुए राज्यपाल ने कश्यप ऋषि के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा, "कश्यप ऋषि के लिए मैं कहीं भी जाने को तैयार हूँ।" राज्यपाल ने इस पुस्तक की महत्ता और समाज में इसके सकारात्मक प्रभाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।

कश्यप ऋषि और कश्मीर का विशेष जुड़ाव

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पुस्तक के विमोचन के लिए अपनी तुरंत सहमति देने के पीछे की वजह का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब संजय जी ने उन्हें इस पुस्तक लोकार्पण समारोह के लिए आमंत्रित किया और उन्होंने किताब का शीर्षक देखा, तो उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की।

"जब संजय जी ने मुझे बुक लॉन्च के लिए बुलाया और मैंने कश्यप ऋषि से जुड़ा शीर्षक देखा, तो मेरा तुरंत जवाब हाँ था, क्योंकि मैं कश्यप ऋषि से जुड़ी किसी भी चीज़ से जुड़ना चाहूँगा। मेरा व्यक्तिगत संबंध और अनुभव कश्मीर की धरती से बहुत ही गहराई से जुड़ा हुआ है।"

उन्होंने आगे कहा कि वह इस पुस्तक को पूरी गंभीरता से पढ़ेंगे। उनका मानना है कि इस पुस्तक से समाज में एकता और आपसी भाईचारे का एक बहुत ही सुंदर और मजबूत संदेश जाता है।

बिहार में सामाजिक सौहार्द और एकता

अपने संबोधन में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अपनी पृष्ठभूमि और बिहार के प्रति अपने लगाव को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन अब वह पूरी तरह से बिहार के रंग में रंग चुके हैं और खुद को यहीं का मानते हैं।

बिहार की सामाजिक व्यवस्था पर बात करते हुए राज्यपाल ने कहा, "मैं उत्तर प्रदेश का हूँ लेकिन अब बिहार का हो गया हूँ। बिहार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ के लोगों में आपसी एकता बहुत मजबूत है। हालांकि, कभी-कभार जात-पात को लेकर कुछ छिटपुट घटनाएं जरूर सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद यहाँ का सामाजिक ताना-बाना और आपसी भाईचारा हमेशा अटूट रहता है। मेरे यहाँ रहते हुए हमेशा यह पुरजोर कोशिश रहेगी कि बिहार की यह एकता और सामाजिक सौहार्द हमेशा बना रहे और इसमें कोई आंच न आए।"

सैन्य सेवा से राजभवन तक का गौरवशाली सफर

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन वर्तमान में बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह भारतीय सेना के एक अत्यंत सम्मानित और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हैं। सेना में उनका करियर बेहद शानदार और उपलब्धियों से भरा रहा है जिसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • चार दशकों की सैन्य सेवा: उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं और विभिन्न अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील पदों का उत्तरदायित्व संभाला।
  • श्रीनगर 15 कोर की कमान: वर्ष 2012 से 2014 के बीच उन्होंने श्रीनगर में स्थित प्रसिद्ध 15 कोर (जिसे चिनार कोर भी कहा जाता है) के कमांडर के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया और घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम योगदान दिया।
  • चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनाती: अपने लगभग चालीस साल के लंबे करियर में उन्होंने देश-विदेश के कई बेहद संवेदनशील और कठिन क्षेत्रों जैसे श्रीलंका, सियाचिन, उत्तर-पूर्वी भारत और जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा की जिम्मेदारी निभाई।
  • अंतरराष्ट्रीय अनुभव: वह मोज़ाम्बिक और रवांडा जैसे देशों में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों का भी हिस्सा रहे और वहां भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व किया।
  • सैन्य सचिव की जिम्मेदारी: वह भारतीय सेना के मिलिटरी सचिव के महत्वपूर्ण पद पर भी कार्यरत रहे।
  • सेवानिवृत्ति और अन्य दायित्व: जुलाई 2013 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने कई अहम ज़िम्मेदारियां निभाईं। साल 2018 में उन्हें केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय का कुलाधिपति भी बनाया गया था।

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