क्या आपको लगता है कि स्कूल या कॉलेज के दिनों में कम अंक हासिल करने वाले या परीक्षाओं में बार-बार असफल होने वाले लोग जीवन में कुछ बड़ा नहीं कर सकते? अगर हां, तो आपको छत्तीसगढ़ कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी अवनीश शरण की कहानी जरूर पढ़नी चाहिए। अवनीश शरण न केवल उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक आदर्श हैं जो अपनी बिगड़ती सेहत और बढ़ते वजन से परेशान हैं।
हाल ही में आईएएस अवनीश शरण ने सोशल मीडिया पर अपनी फिटनेस यात्रा की कुछ ऐसी तस्वीरें और मेडिकल रिपोर्ट साझा की हैं, जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह गया है। 45 वर्ष की उम्र में उन्होंने जैसा शारीरिक बदलाव हासिल किया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन यह सफलता उन्हें रातों-रात नहीं मिली। इसके पीछे उनके करियर की तरह ही कड़ा संघर्ष, अनुशासन और कभी न हार मानने वाला जज्बा छिपा है।
शैक्षणिक असफलताओं से आईएएस अधिकारी बनने तक की अद्भुत कहानी
आईएएस अवनीश शरण का शुरुआती जीवन और शैक्षणिक सफर किसी औसत छात्र जैसा ही था। उन्हें कभी भी एक 'प्रतिभाशाली छात्र' के रूप में नहीं देखा गया। यदि आप उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड पर नजर डालेंगे, तो आपको उनकी कामयाबी और भी बड़ी लगेगी। अवनीश शरण ने 10वीं कक्षा में महज 44.7% अंक हासिल किए थे। इसके बाद 12वीं कक्षा में उन्हें 65% और स्नातक (ग्रेजुएशन) में केवल 60% अंक मिले थे। इतने कम अंकों के साथ कोई भी सामान्य छात्र देश की सबसे कठिन परीक्षा में बैठने की सोच भी नहीं सकता, लेकिन अवनीश के सपने बड़े थे।
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्होंने सरकारी नौकरियों की तैयारी शुरू की, तो असफलताओं ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। वह कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) और सेंट्रल पुलिस फोर्सेज (CPF) की परीक्षाओं में फेल हो गए। इसके बाद उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) की परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। आपको जानकर हैरानी होगी कि वह राज्य पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा (प्रिलिम्स) में एक या दो बार नहीं, बल्कि 10 से अधिक बार असफल हुए।
इतनी लगातार असफलताओं के बाद कोई भी इंसान हिम्मत हार सकता है, लेकिन अवनीश शरण के स्वभाव में हार मानना शामिल नहीं था। अपनी इसी जिद और अटूट दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। पहले प्रयास में वे साक्षात्कार (इंटरव्यू) तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखा और साल 2009 में अपने दूसरे प्रयास में अखिल भारतीय स्तर पर 77वीं रैंक (AIR 77) हासिल की। इसके साथ ही वे छत्तीसगढ़ कैडर के एक आईएएस अधिकारी बन गए। वर्तमान में वे रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के सीईओ के पद पर कार्यरत हैं।
39 वर्ष की उम्र में बिगड़ी सेहत और फिर शुरू हुआ बदलाव का दौर
करियर में सफलता हासिल करने के बाद, आईएएस अधिकारी के रूप में काम करते हुए अवनीश शरण की व्यस्तता काफी बढ़ गई थी। साल 2020 में आई वैश्विक महामारी कोविड के बाद, जब उनकी उम्र 39 वर्ष थी, तब उन्होंने महसूस किया कि उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है। अत्यधिक व्यस्त दिनचर्या, काम के तनाव और उचित खान-पान न होने के कारण उनका वजन और शरीर में वसा (बॉडी फैट) का स्तर काफी बढ़ चुका था।
उस समय की मेडिकल जांच में सामने आया कि उनके शरीर का फैट 30% से अधिक हो गया था। उनका कुल कोलेस्ट्रॉल स्तर 278 तक पहुंच गया था और एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) का स्तर 205 को पार कर गया था, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक था। उन्होंने सेहत सुधारने की कोशिशें तो कीं, लेकिन सरकारी नौकरी की भारी जिम्मेदारियों और पारिवारिक व्यस्तताओं के कारण उनका फिटनेस रूटीन बार-बार टूटता रहा।
साल 2024 में एक सर्जरी के कारण उन्हें अपनी शारीरिक ट्रेनिंग को पूरी तरह से रोकना पड़ा। लेकिन जून 2025 से उन्होंने एक नई और मजबूत शुरुआत करने का फैसला किया। इस बार उन्होंने किसी शॉर्टकट या क्रैश डाइट का सहारा नहीं लिया, बल्कि पूरी तरह से अनुशासन और निरंतरता को अपना हथियार बनाया।
आईएएस अवनीश शरण का 'स्मार्ट' और टिकाऊ फिटनेस प्लान
अवनीश शरण ने बिना किसी कृत्रिम सप्लीमेंट या दवाओं के, पूरी तरह से बुनियादी और प्राकृतिक चीजों पर ध्यान केंद्रित किया। उनके इस बेहतरीन ट्रांसफॉर्मेशन के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित नियम शामिल थे:
- शारीरिक प्रशिक्षण (ट्रेनिंग): उन्होंने सप्ताह में 5 से 6 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग) की। मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने प्रोग्रेसिव ओवरलोड तकनीक का इस्तेमाल किया। कार्डियो एक्सरसाइज को उन्होंने किसी सजा की तरह नहीं लिया, बल्कि अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और रोजाना पैदल चलने को प्राथमिकता दी।
- पोषण और आहार: उन्होंने बाहर के बने और डिब्बाबंद भोजन (प्रोसेस्ड फूड) का सेवन पूरी तरह से बंद कर दिया। कैलोरी को ट्रैक करते हुए उन्होंने घर का बना उच्च प्रोटीन युक्त भोजन, हरी सब्जियां, ताजे फल और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को अपनी डाइट का मुख्य हिस्सा बनाया।
- जीवनशैली में बदलाव: उन्होंने चीनी (शर्करा) का सेवन बेहद सीमित कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और रिकवरी के लिए रोजाना कम से कम 6 से 7 घंटे की गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना सुनिश्चित किया।
चमत्कारी परिणाम: मेडिकल रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी रह गए हैरान
आईएएस अवनीश शरण ने 1 जनवरी 2026 को अपने लिए एक नया लक्ष्य तय किया था। उन्होंने संकल्प लिया था कि वे अपनी बेटी वेदिका के जन्मदिन (27 जून) तक अपने जीवन की सबसे बेहतरीन शारीरिक फिटनेस हासिल करेंगे। इस कठिन सफर में उनकी पत्नी रुद्राणी ने उनका पूरा सहयोग किया और उनके आहार का विशेष ध्यान रखा।
उनकी मेहनत रंग लाई और छह महीनों के भीतर उनका वसा (बॉडी फैट) प्रतिशत 30% से घटकर सिंगल डिजिट (एक अंक) में आ गया। लेकिन इससे भी बड़ा और आश्चर्यजनक बदलाव उनकी रक्त रिपोर्ट (ब्लड टेस्ट रिपोर्ट) में देखने को मिला, जिसे देखकर उनके डॉक्टर भी हैरान रह गए:
- कुल कोलेस्ट्रॉल: यह 278 से घटकर सीधे 158 पर आ गया, जिसमें 43% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
- LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल): यह 205.2 से गिरकर महज 83 रह गया, जिसमें 60% की भारी कमी आई।
- HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल): यह 51 से बढ़कर 62.8 हो गया, जिससे इसमें 23% का सुधार हुआ।
- ट्राइग्लिसराइड्स: यह 109 से घटकर सिर्फ 61.9 रह गया।
युवाओं और प्रतियोगियों के लिए आईएएस अवनीश की खास सलाह
अपने इस असाधारण सफर से मिली सीख को साझा करते हुए आईएएस अवनीश शरण कहते हैं कि वजन कम करना या बेहतर दिखना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं है। उनके लिए असली जीत यह है कि वे अपनी 39 साल की उम्र की तुलना में आज 45 साल की उम्र में कहीं अधिक ऊर्जावान, स्वस्थ और तंदुरुस्त महसूस करते हैं।
वे देश के युवाओं और सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को कुछ बेहद महत्वपूर्ण सलाह देते हैं:
- कभी भी शुरुआत करने के लिए किसी 'परफेक्ट समय' का इंतजार न करें। आज से ही छोटे कदम उठाना शुरू करें।
- सिर्फ मोटिवेशन के भरोसे न बैठें, बल्कि अपने जीवन में अच्छी आदतें और अनुशासन विकसित करें, क्योंकि प्रेरणा कुछ समय के लिए होती है लेकिन आदतें हमेशा साथ देती हैं।
- जल्दी वजन घटाने के चक्कर में किसी भी तरह की क्रैश डाइट या अस्वस्थ शॉर्टकट का सहारा न लें।
- वजन नापने वाली मशीन के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अपनी मेडिकल रिपोर्ट और आंतरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।
- धैर्य रखें, क्योंकि चाहे वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी हो या फिटनेस का सफर, स्थायी और बेहतरीन परिणाम आने में महीनों और वर्षों का समय लगता है, हफ्तों का नहीं।
आईएएस अवनीश शरण की यह कहानी साबित करती है कि यदि आपके पास दृढ़ संकल्प, सही मार्गदर्शन और अटूट अनुशासन है, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर किसी भी असफलता को मात देकर एक नया इतिहास रचा जा सकता है।
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