बिहार की वो दो जांबाज बेटियां जिन्होंने बढ़ाया देश का मान, जानें कौन हैं आईएफएस पूजा कुमारी झा और आईपीएस तनुश्री

बिहार की दो होनहार बेटियों की बहादुरी और सूझबूझ की चर्चा आज देश-विदेश में हो रही है। ढाका में तिरंगे का मान बढ़ाने वाली आईएफएस पूजा झा और कश्मीर में 'दीदी' के नाम से लोकप्रिय हुईं आईपीएस तनुश्री की कहानी हर किसी को प्रेरित कर रही है।

बिहार के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि यहाँ की मिट्टी में कुछ ऐसा खास है जो विपरीत परिस्थितियों और संघर्षों के बीच भी असाधारण प्रतिभाओं को निखरने का अवसर देता है। जब भी देश की सीमाओं की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा या फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कूटनीति की बात आती है, बिहार के जांबाजों ने हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। आज सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गलियारों तक, बिहार की दो बेटियों के हौसले और उनकी बुद्धिमत्ता की खूब चर्चा हो रही है। लोग पूरे गर्व के साथ सोशल मीडिया पर कह रहे हैं कि "हां हम बिहारी हैं जी..."। यह केवल एक वाक्य नहीं है, बल्कि उस गौरवशाली अहसास का प्रतीक है जिसे आईएफएस पूजा कुमारी झा और आईपीएस तनुश्री ने अपने शानदार कार्यों के जरिए देश और दुनिया के सामने साबित कर दिखाया है।

एक तरफ जहाँ देश की संप्रभुता और अखंडता के सम्मान से खिलवाड़ करने वाले पड़ोसियों को विदेशी धरती पर ही कड़ा कूटनीतिक पाठ सिखाने वाली जांबाज कूटनीतिज्ञ चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ कश्मीर के सबसे अशांत और आतंकवाद प्रभावित इलाकों में बंदूक के डर से नहीं, बल्कि अपनी जांबाजी, संवेदनशीलता और सौहार्दपूर्ण व्यवहार से स्थानीय लोगों का दिल जीतने वाली पुलिस अधिकारी अब देश की राजधानी दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी संभालने आ रही हैं। इन दोनों बेटियों ने अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और दृढ़ संकल्प के बल पर न केवल अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि पूरे बिहार का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर दहाड़ीं बिहार की बेटी आईएफएस पूजा कुमारी झा

इन दिनों अंतरराष्ट्रीय राजनयिक हलकों में वर्ष 2022 बैच की भारतीय विदेश सेवा (IFS) की अधिकारी पूजा कुमारी झा की जमकर तारीफ हो रही है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान उन्होंने जिस त्वरित सूझबूझ और निडरता का परिचय दिया, उसने भारतीय कूटनीति के इतिहास में एक नया उदाहरण स्थापित किया है। ढाका में 'बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज' (BIISS) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण सेमिनार में कई देशों के पूर्व राजनयिक, रणनीतिक विशेषज्ञ और गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

इस सेमिनार के दौरान एक प्रस्तुति के समय एक बड़ी और गंभीर कूटनीतिक चूक सामने आई। स्क्रीन पर दिखाए जा रहे भारत के नक्शे के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जिसमें भारत के अभिन्न हिस्से जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान के भाग के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इस गंभीर भूल पर जहाँ अन्य प्रतिनिधि विचार ही कर रहे थे, वहीं दर्शकों के बीच बैठीं भारत की युवा राजनयिक पूजा कुमारी झा ने कूटनीतिक प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए तुरंत अपनी सीट से उठकर इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया।

उन्होंने अत्यंत दृढ़ और स्पष्ट शब्दों में इस कृत्य का विरोध करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। इस बेहद तीखे और स्पष्ट विरोध के बाद कार्यक्रम के आयोजकों और प्रस्तुति देने वाले पूर्व राजनयिक के पास अपनी गलती स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। उन्हें तत्काल मंच से अपनी भूल माननी पड़ी और नक्शे को सही किया गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग पूजा कुमारी झा के इस साहसिक और बेबाक अंदाज की जमकर सराहना कर रहे हैं।

एक बेहद साधारण परिवार से शीर्ष राजनयिक बनने तक का सफर

पूजा कुमारी झा की यह सफलता जितनी शानदार है, उनकी यहाँ तक पहुँचने की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है। वे मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले की रहने वाली हैं। पूजा एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता हरियाणा के गुरुग्राम में एक निजी कार्यालय में ऑफिस हेल्पर (दफ्तर के सहायक) के रूप में कार्यरत थे। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण उनका बचपन और प्रारंभिक जीवन काफी चुनौतियों से भरा रहा।

उनकी शुरुआती शिक्षा देश की राजधानी दिल्ली के एक सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल में हुई थी। अंग्रेजी के दबदबे वाले सिविल सेवा के क्षेत्र में एक सरकारी हिंदी माध्यम स्कूल से पढ़ी लड़की का देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल होना अपने आप में एक मिसाल है। पूजा ने कभी भी अपनी आर्थिक स्थिति या हिंदी माध्यम की पृष्ठभूमि को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बल पर अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर ली।

इस परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 82वीं रैंक हासिल की, जो उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है। इस शानदार सफलता के बाद उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) को चुना। वर्तमान में पूजा कुमारी झा बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्थित भारतीय उच्चायोग में 'द्वितीय सचिव' (पॉलिटिकल एंड इंफॉर्मेशन) के रूप में तैनात हैं और वे अपनी बेहतरीन कार्यशैली के कारण देश की सबसे होनहार युवा महिला राजनयिकों में गिनी जाती हैं।

पुलवामा की 'दीदी' आईपीएस तनुश्री की विदाई पर भावुक हुआ कश्मीर

दूसरी तरफ, बिहार के ही मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) जिले की रहने वाली वर्ष 2017 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की अधिकारी तनुश्री की कहानी भी उतनी ही जांबाजी और संवेदना से भरी है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रशासनिक फेरबदल के तहत तनुश्री को जम्मू-कश्मीर के सबसे संवेदनशील जिलों में से एक पुलवामा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पद से स्थानांतरित कर दिल्ली पुलिस में तैनात किया गया है। यूँ तो सरकारी सेवा में तबादला एक सामान्य और नियमित प्रक्रिया है, लेकिन तनुश्री की विदाई ने पूरी कश्मीर घाटी, विशेषकर पुलवामा और शोपियां के लोगों को भावुक कर दिया है।

तनुश्री ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जैसे बेहद संवेदनशील और आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में अपने कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में जो ऐतिहासिक काम किया है, उसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी। उन्होंने हिज्बुल मुजाहिद्दीन और अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ चलाए गए कई खतरनाक और सफल अभियानों का अग्रिम मोर्चे पर रहकर खुद नेतृत्व किया। वह केवल दफ्तर में बैठकर आदेश देने वाली अधिकारी नहीं थीं, बल्कि आतंकियों के खिलाफ मुठभेड़ के समय खुद सुरक्षाबलों के साथ मैदान में डटी रहती थीं।

लेकिन तनुश्री की सबसे बड़ी पहचान केवल एक कड़क और बहादुर पुलिस अधिकारी की नहीं रही, बल्कि उन्होंने अपनी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से घाटी के आम नागरिकों का दिल जीता। उन्होंने कश्मीर के भटके हुए युवाओं और आम जनता के साथ एक गहरा भावनात्मक रिश्ता कायम किया। पुलिस और जनता के बीच की दूरी को मिटाते हुए उन्होंने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि पुलिस उनकी सुरक्षा और बेहतरी के लिए है। यही कारण था कि वहाँ के स्थानीय निवासी और विशेषकर युवा उन्हें आदर और स्नेह से 'दीदी' कहकर बुलाने लगे थे। जैसे ही उनके स्थानांतरण की खबर आई, घाटी के तमाम सोशल मीडिया यूजर्स और स्थानीय लोग भावुक हो गए और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रिय अधिकारी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पोस्ट साझा किए।

सीआरपीएफ की कठिन ड्यूटी के साथ पहले प्रयास में हासिल की सफलता

तनुश्री का सफरनामा देश की हर उस बेटी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने का साहस करती है। साल 2014 में उनका चयन सबसे पहले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर हुआ था। अर्धसैनिक बलों की नौकरी कितनी कठिन, शारीरिक रूप से थका देने वाली और चुनौतियों से भरी होती है, यह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इस व्यस्त और अत्यधिक तनावपूर्ण दिनचर्या के बीच भी तनुश्री ने अपने सपनों को सीमित नहीं होने दिया।

उन्होंने अपनी ड्यूटी के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। उनकी लगन का ही परिणाम था कि साल 2016 में अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर ली। इस परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 652वीं रैंक प्राप्त की और वर्ष 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी बनकर देश की सेवा में जुट गईं। जम्मू-कश्मीर में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने साबित कर दिया कि एक महिला अधिकारी किस प्रकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज में शांति और भाईचारे का संदेश भी फैला सकती है।

एक नज़र में दोनों अधिकारियों की उपलब्धियाँ

  • आईएफएस पूजा कुमारी झा: मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली, वर्ष 2022 बैच की राजनयिक हैं। उन्होंने दिल्ली के सरकारी हिंदी माध्यम विद्यालय से पढ़ाई कर पहले ही प्रयास में यूपीएससी में 82वीं रैंक हासिल की। वर्तमान में वह ढाका में तैनात हैं।
  • आईपीएस तनुश्री: बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) जिले की निवासी, वर्ष 2017 बैच की पुलिस अधिकारी हैं। वर्ष 2014 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सहायक कमांडेंट नियुक्त होने के बाद, उन्होंने पहले ही प्रयास में वर्ष 2016 में यूपीएससी क्रैक कर 652वीं रैंक हासिल की।

बिहार की इन बेटियों ने बढ़ाया देश और समाज का मान

आज जब वैश्विक मंचों से लेकर देश के सबसे अशांत क्षेत्रों तक इन दोनों अधिकारियों के कार्यों की सराहना हो रही है, तो बिहार की धरती पर रहने वाले हर एक नागरिक का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। आईएफएस पूजा कुमारी झा जहाँ विदेशों में भारत के राष्ट्रीय हितों और भौगोलिक अखंडता की रक्षा के लिए अडिग खड़ी हैं, वहीं आईपीएस तनुश्री देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के बाद अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था संभालने आ रही हैं।

इन दोनों महिला अधिकारियों का जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और इरादे नेक हों, तो कोई भी बाधा आपके सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती। एक अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर देश की संप्रभुता की रक्षा करना और दूसरी ओर एक सशस्त्र बल की व्यस्त नौकरी के साथ आईपीएस बनकर शांति का दूत बनना, समाज की सभी बेटियों को एक नया संबल देता है।

बिहार की इन दो लाड़लियों ने पूरे विश्व को यह कड़ा संदेश दिया है कि सशक्तिकरण केवल नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए। जब महिलाओं को उचित अवसर और समान अधिकार मिलते हैं, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे देश और समाज का नाम विश्व पटल पर रोशन करती हैं। पूजा कुमारी झा और तनुश्री आज के युवाओं के लिए वास्तविक आदर्श हैं, जो यह साबित करती हैं कि ईमानदारी, समर्पण और निडरता ही किसी भी लोक सेवक की असली पहचान होती है।

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