खेती-किसानी में फसलों की अच्छी पैदावार के लिए खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी है। अगर समय रहते खेतों से खरपतवार को नष्ट न किया जाए, तो ये मुख्य फसल के हिस्से का पोषण सोख लेते हैं जिससे पैदावार पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने बुवाई के ठीक बाद एक खास तकनीक अपनाने की सलाह दी है जिससे खरपतवार खेतों में उग ही नहीं पाएंगे।
बुवाई के बाद शुरुआती 72 घंटे क्यों हैं महत्वपूर्ण?
सागर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव के अनुसार, फसलों की बुवाई के बाद का शुरुआती समय खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे सही और संवेदनशील होता है। खेतों में बुवाई का काम पूरा होने के 72 घंटे के भीतर यानी लगभग दो से तीन दिन के बाद ही खरपतवार नाशी दवाओं का छिड़काव कर देना चाहिए। इस समय छिड़काव करने से खेतों में अनचाही घास और खरपतवार को बढ़ने से रोका जा सकता है।
प्री इमरजेंस दवाओं का करें इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, बाजार में मुख्य रूप से दो तरह की खरपतवार नाशी दवाएं आती हैं। इनमें से एक प्रकार को प्री इमरजेंस कहा जाता है। इस दवा का इस्तेमाल फसल और खरपतवार के उगने से ठीक पहले मिट्टी पर किया जाता है। प्री इमरजेंस दवाएं बुवाई के तुरंत बाद खेतों में एक सुरक्षा परत बना देती हैं, जिससे खरपतवार के बीज अंकुरित नहीं हो पाते।
यह तकनीक विभिन्न फसलों के लिए काफी मददगार साबित होती है, जैसे:
- सोयाबीन
- मक्का
- उड़द
सोयाबीन की फसल के लिए विशेष दवा
डॉक्टर के एस यादव ने बताया कि यदि आप अपने खेतों में मुख्य रूप से सोयाबीन की फसल ले रहे हैं, तो इसके लिए एक विशेष रासायनिक दवा का उपयोग करना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है। सोयाबीन की बुवाई करने के बाद खरपतवारों को रोकने के लिए डाइक्लोसुलाम नाम की रासायनिक दवा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस दवा के छिड़काव से सोयाबीन की फसल सुरक्षित रहती है और खरपतवार की समस्या शुरू होने से पहले ही समाप्त हो जाती है।
https://hindi.news18.com/videos/agriculture/spray-this-chemical-right-after-sowing-the-kharif-crop-it-will-optimize-costs-and-yield-higher-production-local18-10650605.html